गिरफ्तार IAS रामबिलास यादव के फ्लैट से मिले 15 रजिस्ट्री पेपर, जांच टीम की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा-पिछले पांच साल में खरीदी गईं संपत्तियां

Ram Vilas Yadav

उत्तराखंड के भ्रष्ट आईएएस अफसर राम विलास यादव (IAS Ram Vilas Yadav) को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. नैनीताल हाई कोर्ट ने रामविलास यादव 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. लेकिन अब उनको लेकर बड़े खुलेसे हो रहे हैं और विजिलेंस टीम को पनाश घाटी में उनके फ्लैट से पंद्रह से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्रियां और पावर ऑफ अटॉर्नी मिली हैं. जो देहरादून (Dehradun) के स्थानीय लोगों के नाम पर हैं. विजिलेंस को शक है कि यह यादव की बेनामी संपत्ति हो सकती है और इसको लेकर अब टीम ने जांच शुरू कर दी है. एक बात और सामने आ रही है कि राम विलास यादव ने पिछले तीन साल में करीब 50 लाख रुपए कमाए जबकि इस दौरान उसने तीन करोड़ से ज्यादा खर्च किए.

जानकारी के मुताबिक राम विलास यादव के पास से बैकडेटेड के करीब डेढ़ दर्जन खाली स्टांप पेपर भी मिले हैं और इसके साथ ही यादव के फ्लैट में पंद्रह से अधिक संपत्तियों की रजिस्ट्रियां मिली हैं, वे सभी स्थानीय लोगों के नाम हैं. जांच टीम का कहना कि जिन लोगों के नाम की रजिस्ट्री हैं. वह सभी स्थानीय लोग है. इसमें से यूपी या किसी अन्य जगह से कोई नहीं है. खासबात ये है कि इन सभी संपत्तियों का पावर ऑफ अटॉर्नी आईएएस अधिकारी राम विलास यादव के नाम पर है. जब बुधवार को इस बारे में पूछताछ की गई तो यादव ने बताया कि लोगों ने उन्हें अपनी संपत्ति बेचने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी और मूल रजिस्ट्रियां दी थीं. फिलहाल इस जवाब से विजिलेंस की टीम संतुष्ट नहीं है.

विजिलेंस ने रजिस्ट्री को लेकर जांच शुरू की

फिलहाल रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद अब विजिलेंस ने इसको लेकर अपनी जांच शुरू कर दी है और वह उन लोगों की तलाश कर रही है. जिनके नाम ये संपत्तियां हैं. इन लोगों की पहचान कर ये पता किया जाएगा कि इ लोगों ने अपनी संपत्तियां आईएएस अधिकारी को बेचने के लिए क्यों दीं?

चार-पांच साल में खरीदी गई हैं संपत्तियां

एसएसपी-विजिलेंस धीरेंद्र गुंज्याल के मुताबिक राम विलास यादव के पास से जो संपत्तियां मिली हैं. वह पिछले चार-पांच साल में खरीदी गई हैं. इसलिए उनके आईएएस अधिकारी यादव के बेनामी संपत्ति होने का शक और गहरा गया है. जांच टीम का कहना है कि राम विलास यादव की जो भी संपत्तियां अभी तक मिली हैं. वह उनके आय के से लगभग साढ़े पांच सौ प्रतिशत ज्यादा है. जाहिर है कि ऐसे में ये संपत्तियां गलत तरीके से अर्जित की गई हैं.

विजिलेंस को जांच के दौरान पता चला

पता चला कि यूपी में मंडी परिषद और लखनऊ विकास प्राधिकरण में रह रहे आईएएस अधिकारी यादव की कुल आय करीब 50 लाख 48 हजार रुपये आंकी गई थी, जबकि इस दौरान उनका खर्च करीब 3 करोड़ रुपये रहने का अनुमान था। पूछताछ के दौरान यादव न तो कोई जवाब दे सके और न ही कोई दस्तावेज दिखा सके.

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