क्यों खुजाने में हम अच्छा महसूस करते हैं, आखिर क्या है खुजली का विज्ञान

News, New Delhi कहा जाता है खुजली राज रोग है. बड़े बड़े लोगों को कुछ ज्यादा ही होती है. राजा-महाराजाओं को भी ये कुछ ज्यादा ही होती थी.  जब खुजली आए तब खुजाने पर शरीर एक अलग आनंद की अनुभूति करता है.

ये कभी भी कहीं भी हो सकती है.शरीर के किसी भी हिस्से में. किसी भी समय. बस में, ट्रेन में, घर में, दफ्तर में. आप इससे बच नहीं सकते. जब तक खुजाएंगे नहीं, तब तक ये आपका पीछा नहीं छोड़ेगी. खुजली मानव सभ्यता के इतिहास जितनी ही पुरानी है.

बाजार ने भी खुजली को खूब भुनाया है. खुजली दूर करने के लिए तरह-तरह की सुगंधित क्रीम और प्रोडक्ट्स बाजार में आते रहते हैं. टीवी से लेकर इंटरनेट तक इसके विज्ञापनों की बहार है.

खुजली लाया कौन?
खुजली चाहे हो कितनी भी पुरानी लेकिन असल में इस पर तरीके से ध्यान दिया गया सोलहवीं शताब्दी में.  तब सैमुअल हाफेरफेर नाम के एक जर्मन फिजिशियन ने इस समस्या को पहचाना. उसने पहली बार दुनिया को बताया कि खुजली क्या होती है और क्यों होती है. इससे पहले दुनिया को खुजली होती तो थी लेकिन कोई जनता नहीं था कि ये हो क्या रहा है.

किसको कितनी खुजली?
खुजली बाबा आदम से लेकर महेश भट्ट तक को होती रही है. महेश भट्ट और उनकी खुजली को लेकर ना जाने कितने जोक बन गए, शायद इसलिए क्योंकि वो जब भी पब्लिक के सामने आते हैं, चाहे वो टीवी हो या प्रेस कांफ्रेंस या कोई मीटिंग-तब आमतौर पर वो खुजलाते देखे जाते हैं.

इंटरनेट पर उनके ना जाने कितने ऐसे वीडियो आपको मिल जाएंगे. वो अपनी कमीज के आगे पीछे हाथ डालकर खुजाते देखे जा सकते हैं. खुजाने में आखिर शर्मिंदगी कैसी.

महेश भट्ट के बारे में प्रचलित रहा है कि वो चाहे टीवी पर सामने हों या सार्वजनिक जीवन में, उन्हें आप हमेशा खुजली करते देख सकते हैं.
एक दिन में कितनी  बार होती है खुजली
लिवरपुल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर फ्रांसिस मैक्लोन का कहना है कि आमतौर पर एक शख़्स को दिनभर में 97 बार खुजली होती है. कीड़े-मकोड़े और पेड़ पौधे इंसान की त्वचा पर एक टॉक्सिन छोड़ते हैं, जिसके जवाब में शरीर के इम्यून सिस्टम से हिस्टैमिन का स्राव होता है. हिस्टैमिन से मस्तिष्क को खुजली का सिग्नल मिलता है और हम खुजली करने लगते हैं.

खुजली पर रिसर्च करने वाले साइंटिस्ट
एक अमेरिकी वैज्ञानिक जेआर ट्रेवर का किस्सा इसे लेकर सुनाया जाता है. अपने 40वें जन्मदिन पर ट्रेवर को अपने शरीर में तेज खुजली महसूस हुई. ऐसी खुजली की वो परेशान हो गईं. अगले 40 साल उन्होंने इसकी वजह ढूंढने और इलाज में गुजार दिए.उन्होंने खुजलाते-खुजलाते अपनी चमडी तक उधेड़ ली. इसके टुकड़े बडे-बडे वैज्ञानिकों को भेजे, ताकि बीमारी पता चल सके. उन्होंने इस पर रिसर्च पेपर तक लिख डाला.

1948 में अमरीका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी ने इस पर बकायदा रिसर्च पेपर छापा, जिसमें एक डॉक्टर जॉर्ज बिशप ने लिखा कि खुजली होने पर वह कई बार खुद को जोर से खरोंचकर तकलीफ देते हैं. असल में उन्हें इससे राहत मिलती थी. यही वजह है कि कई बार आपके प्रिय परिजन जब आपकी पीठ खुजाते हैं तो आपको अच्छा लगता है.

अमेरिकी कवि ओडगन नैश ने लिखा था, “खुशी वो अहसास है जो हर उस जगह खुजाने से महसूस होता है जहां खुजली होती है” खुशी की यह परिभाषा, शायद खुजली करने वालों के लिए थी.

जितनी खुजाओगे, उतनी होगी खुजली
खुजली के बारे में एक बड़ा अजीबोगरीब तथ्य भी है. वो ये कि अगर आपके सामने बैठा कोई शख्स खुजली कर रहा है तो आप भी खुजाने लगेंगे. इस तरह के संक्रमण वाली खुजली के लिए मस्तिष्क का ‘सुप्राकिएज़मैटिक न्यूक्लियस’ भाग ज़िम्मेदार होता है. खुजली के साथ एक दिलचस्प बात ये भी है कि आप जितना ज़्यादा खुजलाएंगे, आपको उतनी ही ज्यादा खुजली होगी.

विज्ञान ने भी इस पर भरपूर काम किया है. दिनभर में जब हम पौधों, कीड़े मकौड़ों के संपर्क में आते हैं तो एक खास रसायन के चलते हमें खुजली होती है. दिन में एक दो बार नहीं बल्कि 97 बार शरीर खुजली की प्रक्रिया से गुजरता है.

– खुजली करके हमें आराम इसलिए मिलता है क्योंकि और खुजली करते ही हमारे मस्तिष्क से सेरोटोनीन का स्राव होता है. सेरोटोनीन हमें अच्छा महसूस करवाता है.
– ज़्यादातर लोग खुजली और खुजाने को एक ही बात समझ लेते हैं. अरे यार खुजली थी तो खुजा लिया. लेकिन ये दोनों बिलकुल अलग चीज़ें हैं. खुजली परेशान करती है और खुजाना आनंद देता है.
– खुजली हमेशा एक खरोंच की मांग करती है लेकिन साइंस को भी ये भी पता लगाना था कि आखिर खुजली होती क्यों है?

खुजली और खुजाने में फर्क
खुजली और खुजाने का जो चक्र है वह खुशी और दर्द, रिफ्लेक्स और न रोक पाने की नाकामी का एक मिश्रण है. इसे हमेशा शरीर की बाकी चीज़ों की तुलना में कम वैज्ञानिक ध्यान मिला.

दस साल पहले, अंतर्राष्ट्रीय खुजली शोधकर्ताओं के एक छोटे से ग्रुप में एक ने खुजली को बेहद दुखी और उपेक्षित बीमारी का दर्जा दिया. जैसे ही खुजली होती है सब बस खुजा लेते हैं लेकिन कोई सोचता नहीं कि यह क्यों हो रही है.

अब वैज्ञानिक इसे समझना शुरू कर रहे हैं
अब वैज्ञानिक धीरे-धीरे खुजली की वैज्ञानिक समझ को समझना शुरू कर रहे हैं. उनमें खुजली संवेदनाओं को प्रसारित करने के लिए समर्पित नर्व फाइबर की पहचान शामिल है. ये जानने की कोशिश हो रही है कि उन समय मस्तिष्क कैसे व्यवहार करता है. खुजली विशेषज्ञों का मानना ​​है कि खुजली के रोगियों के लिए बेहतर उपचार जल्द ही बाजार में होंगे.

खुजली और ज्योतिष
भारतीय ज्योतिष में तो शरीर के कई हिस्सों में  खुजली बहुत फायदेमंद बताई गई है.
– सीधे हाथ में खुजली का मतलब आपके पास पैसा आने वाला है.
– कंधे में खुजली का मतलब आपको कुछ बड़ा फ़ायदा मिलने वाला है.
– उलटे हाथ में खुजली का मतलब आपका कोई चाहने वाला आपकी याद कर रहा है.
– सिर के पीछे खुजली का मतलब आपको दफ्तर में प्रमोशन मिलने वाला है.

– खुजली क्यों होती है इसपर तो बहुत शोध सामने आए हैं लेकिन कोई आजतक यह नहीं पता लगा पाया कि खुजली होने पर खुजाने के बाद इतना सुखद अनुभव क्यों होता है.

कितने तरह की होती है
अगर चिकित्सा विज्ञान की मानें तो खुजली मुख्य तौर पर 04 तरह की होती है.
1. बिना दानों के खुजली
2. दाने वाली खुजली
3. बिना दाने या दाने वाली खुजली के कारण खुजली के अन्य लक्षण उत्पन्न होते हैं. खुजली पूरी त्वचा, सिर, मुंखपांव अंगुलियों, नाक, हाथ या प्रजनन अंग आदि अंगों में हो जाती है. खुजली अधिकतर इन्हीं स्थानों पर होती है.
4. बिना दानों वाली या दानों वाली खुजली खुश्क या तर हो सकती है.

दाने या बिना दाने वाली खुजली भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में भिन्न भिन्न प्रकार की हो सकती हैं. कोई खुजली नहाने के बाद कम हो जाती है तो कोई रात में कपड़े बदलते समय बढ़ जाती है और तभी महसूस होती है.

कोई गर्म सेंक से घटती है, कोई स्थान बदल देती है. एक जगह खुजली ठीक होती ही दूसरी जगह होने लगती है. किसी खुजली में खुजलाते-खुजलाते खून निकलने लगता है.

वैसे ये बीमारी केवल मनुष्यों की नहीं है, रिसर्च बताती हैं कि बंदरों से लेकर जानवरों में खुजली की समस्या होती है. इस मामले में बंदर सबसे अच्छा है, उसे जब खुजली की तलब होती है तो खुद ये काम कर लेता है या फिर अपने साथी की मदद ले लेता है.

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