क्या है सेना का रेजिमेंट सिस्टम… जो अग्निपथ स्कीम के बाद चर्चा में है… क्या अब ये भी बदल जाएगा?

Indian Army Regiments

भारतीय सेना में भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ स्कीम (Agneepath Scheme) को लेकर बवाल जारी है. अब सेना अग्निवीर स्कीम के जरिए सेना में जवानों की भर्ती करेगी, जिसे लेकर लोगों के मन में अभी भी कई सवाल हैं. इन सवालों में एक सवाल भारतीय सेना की रेजिमेंट (Indian Army Regiments) को लेकर भी है. कई लोगों का मानना है कि अग्निपथ स्कीम के बाद सेना के रेजिमेंट सिस्टम में बदलाव आए जाएगा. जाति और क्षेत्र के आधार पर बनाई गई रेजिमेंट को लेकर अभी अलग नियम है. ऐसे में आज हम बात करते हैं सेना के रेजिमेंट सिस्टम के बारे में और बातते हैं कि अग्निवीर से इस पर कितना असर पड़ेगा.

तो जानते हैं रेजिमेंट सिस्टम क्या है और किस तरह से आर्मी में इसकी शुरुआत हुई थी. साथ ही आपको बताएंगे कि सेनाओं की इन रेजिमेंट को जाति के आधार पर क्यों बांटा गया है. इसके बाद आप सेना के रेजिमेंट सिस्टम को समझ जाएंगे.

क्या होता है रेजिमेंट सिस्टम?

भारतीय सेना में जब भी अधिकारी रैंक लेवल को छोड़कर किसी की भी एंट्री होती है तो उसे एक रेजिमेंट का हिस्सा बनाया जाता है. यह रेजिमेंट कुछ खास जाति से आने वालों या किसी खास इलाके से आने वालों के लिए विशेष हो सकती है. इन रेजिमेंट में जाट, गोरखा आदि कई रेजिमेंट है. सेना में शुरुआत रेजिमेंट से होती है. इसमें अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था है, मतलब राजस्थान में राजपूत जाति से आने वाला एक सैन्य अधिकारी गोरखा रेजिमेंट में भी हो सकता है.

वैसे आपको बता दें कि भारतीय थल सेना में ही रेजिमेंट की व्यवस्था है जबकि वायु सेना और नौसेना में ऐसा नहीं है. यह एक तरीके का सैन्य दल होता है और ये थल सेना का एक हिस्सा होता है. कई रेजिमेंट मिलकर पूरी थल सेना बनाती है. थलसेना में भी ये रेजिमेंट मुख्यतया इंफ्रेंट्री में देखने को मिलती हैं. माने पैदल सेना. जो सबसे आगे लड़ाई लड़ते हैं. मगर अब ईएमई, ऑरडेंनेस, एएससी सिग्नल हैं उसमें जाति नहीं है.

जाति के आधार पर जो रेजिमेंट बनीं उनमें राजपूत, जाट, डोगरा, राजपूताना, महार आदि शामिल है. वहीं, क्षेत्र के आधार पर बनने वाली रेजिमेंट बिहार, कुमाउं, लदाख, मद्रास, असम आदि शामिल हैं. इनके अलावा कम्युनिटी के आधार पर गोरखा या मराठा जैसी रेजिमेंट बनाई गई.

रेजिमेंट और बटालियन में क्या अंतर है?

रेजिमेंट एक बड़ी यूनिट है, जिसमें कई बटालियन शामिल होती हैं. फिर इनमें कई सारी बटालियन बनाई जाती हैं. हर रेजिमेंट में बटालियनों की संख्या अलग-अलग होती है. मोटे तौर पर एक बटालियन 900 सैनिकों का एक समूह होता है.

जाति के आधार पर क्यों बनाई गई रेजिमेंट?

बता दें कि आज भारत के पास जो सेना है, उसे अंग्रेजों ने बनाया था. जब अंग्रेज भारत आए थे तो अपने लिए पूरी फौज इंग्लैंड से नहीं लाए थे. अधिकारियों के अलावा फिर उन्होंने भारत में अपने अनुभवों के आधार पर सेना का निर्माण किया. साल 1857 की क्रांति के बाद जाति आधारित रेजिमेंट पर जोर दिया गया. इसके बाद से अंग्रेजों ने उन जातियों या क्षेत्र का चयन किया, जिनके या जहां के लोग एतिहासिक रूप से लड़ाई में हिस्सा लेते आ रहे हैं. इसमें डोगरा, गोरखा, राजपूत लोग ज्यादा शामिल थे.फिर उन्हें सेना में भर्ती किया गया.

अग्निपथ योजना से रेजिमेंट सिस्टम पर कुछ प्रभाव पड़ेगा?

बता दें कि भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि अग्निपथ योजना से रेजिमेंट सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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