कोविड होने के बाद नहीं खत्म हो रही थकान की समस्या? जानिए ऐसा हो क्यों रहा है

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मेडिकल की भाषा में क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome) को एक ऐसी स्थिति माना गया है जिसमें व्यक्ति अत्यधिक थकान (Fatigue) महसूस करता है और ये थकान आराम करने के बाद भी नहीं जाती. यही नहीं, किसी बीमारी के बाद ये थकान छह महीने बाद तक भी पीछा नहीं छोड़ती. इस थकान की वजह से व्यक्ति को रोजमर्रा के काम करने तक में परेशानी होती है. सीएफएस को मायल्जिक एन्सिफेलोमाइलाइटिस (एमई) भी कहा जाता है जिसकी सही वजह का अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है. क्रोनिक फैटीग सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को कई कार्यों से समझौता करना पड़ता है. ऐसे में Chronic Fatigue Syndrome जागरूकता दिवस 2022 मनाने का उद्देश्य प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना और विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों के साथ मिलकर इस पुरानी बीमारी के इलाज के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करना है.

कोरोना महामारी ने क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम की स्थिति को और खराब कर दिया है और इस वजह से भी इस सिंड्रोम के मामले बढ़े हैं. कोरोना महामारी से पहले हुए एक भारतीय अध्ययन के अनुसार, उस समय करीब 12 प्रतिशत महिलाएं अत्यधिक थकान का शिकार थीं. कोविड के बाद हुए 21 अध्ययनों की समीक्षा से सामने आया है कि अब 13 से 33 प्रतिशत लोग कोरोना के लक्षण सामने आने के 16-20 सप्ताह बाद तक बेहद थकान महसूस कर रहे थे. ये एक बड़ी और परेशान करने वाली समस्या है.

क्रोनिक फेटीग सिंड्रोमऔर कोरोना के कई लक्षण एक जैसे हैं

क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम और लंबे समय तक कोविड होने के लक्षणों के बीच उल्लेखनीय समानताएं हैं. दोनों में ही खासी थकान, दिमाग से कुछ स्पष्ट रूप से समझ न पाना और मांसपेशियों में दर्द शामिल है. क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम और लंबे समय तक कोविड के लक्षण एक दूसरे पर हावी होते हैं. कोविड-19 की चपेट में आने वाले अधिकांश लोग कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. लेकिन हल्के इंफेक्शन वाले कुछ लोग शुरुआती स्तर पर ठीक होने के बावजूद इसके लक्षण महसूस करते रहते हैं. बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज तो कोविड-19 के लक्षणों को लंबे समय तक झेलते ही हैं, वहीं स्वस्थ और युवा भी इसकी वजह से संक्रमण दूर होने के हफ्तों से महीनों बाद तक भी अस्वस्थ महसूस कर सकते हैं. इनमें से कुछ लक्षण Chronic Fatigue Syndrome के लक्षणों के साथ भी मिल जाते हैं.

मानसिक परेशानी भी बढ़ी

फोर्टिस हॉस्पिटल की बेंगलुरु ब्रांच में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आदित्य एस. चौटी ने बताया कि कोविड-19 की वजह से मानसिक अस्थिरता भी देखने में आ रही है. ऐसी कई वजहें हैं जो मानसिक तनाव का कारण बनती हैं और इस वजह से भी Chronic Fatigue Syndrome हो सकता है. उनका कहना है कि कोविड-19 भी एक वायरस की वजह से होने वाली बीमारी है और ऐसी समस्याओं में थकान एक बहुत ही सामान्य लक्षण है. और आमतौर पर जब ये वायरस शरीर से निकलता है तो अपने पीछे थकान यानी कि Fatigue Syndrome छोड़ जाता है.

क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम के लक्षण

किसी व्यक्ति के सीएफएस से पीड़ित होने के संकेत और लक्षण कुछ इस प्रकार होते हैं –

– जोड़ों का दर्द
– याद्दाश्त का कमजोर होना
– एकाग्रता की कमी
– सिरदर्द और चिड़चिड़ापन
– अत्यधिक थकान और चक्कर आना
– नींद से जुड़ी समस्याएं
– अवसाद, तनाव और चिंता
– उलटी आने जैसा महसूस होना
– फ्लू जैसे लक्षण
– कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द

क्रोनिक फेटीग सिंड्रोमआमतौर पर मध्यम आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है और इसमें भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं के प्रभावित होने की संभावना अधिक होती है. अधिक वजन वाले और जो लोग एक्टिव लाइफस्टाइल नहीं जीते हैं, उनको भी सीएफएस होने का खतरा ज्यादा होता है. इसके अलावा, अत्यधिक तनाव, बिस्तर या कुर्सी से ज्यादा नहीं उठना और काम करने के घंटों का नियमित न होना भी व्यक्ति को सीएफएस का मरीज बना सकते हैं.

क्यों होता है सीएफएस

एमई/सीएफएस का सही कारण अभी पूरी तरह ज्ञात नहीं है लेकिन इसकी कई वजहें मानी जाती हैं. उदाहरण के लिए, यह एक संक्रमण से शुरू हो सकता है या फिर कुछ कारक हों जिनकी वजह से आपके बीमार होने की संभावनाएं बढ़ जाएं. एमई/सीएफएस इन वजहों से हो या बढ़ सकता है:

– वायरल संक्रमण, जैसे ग्रंथि संबंधी बुखार
– बैक्टीरिया संक्रमण से जैसे कि निमोनिया
– शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का ठीक से काम न करना
– अनुवांशिक कारण – कुछ परिवारों में एमई/सीएफएस की समस्या बिना किसी खास वजह से भी हो सकती है

एमई/सीएफएस के साथ जीवन जीना मुश्किल हो सकता है. अत्यधिक थकान और अन्य शारीरिक लक्षण रोजमर्रा की गतिविधियों को ही मरीज के लिए बड़ी चुनौती बना देते हैं. इससे उबरने के लिए मरीज को जीवनशैली में कुछ बड़े बदलाव तक करने पड़ सकते हैं.

एमई/सीएफएस आपके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ ही आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचा सकता है. अगर आप भी इस समस्या ये जूझ रहे हैं तो बेहतर होगा कि अपने परिवार और दोस्तों से समर्थन मांगने के साथ-साथ आप एमई/सीएफएस को झेल रहे अन्य लोगों से बात कर उनके सुझाव भी लें.

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