कोलकाता दुर्गा पूजा: ‘मयूरपंखी नौका’ की थीम पर बने पंडाल में विराजेंगी ‘मां’, 40 फीट होगा ऊंचा

बड़ाबाजार यंग बॉयज क्लब इस वर्ष 53वें वर्ष में पूजा का आयोजन कर रहा है. क्लब ने इस साल मयूरपंखी नौका को पूजा पंडाल का थीम बनाया है, यह 40 फीट ऊंचा होगा.

फोटोः मयूरपंखी नौका के तर्ज पर बनेगा मां दुर्गा का पंडाल.

Image Credit source: फाइल फोटो

कोलकाता में दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई है और जब भी पश्चिम बंगाल में पूजा पंडालों को थीम में ढालने की बात आती है, तो हर साल यहां आयोजित होनेवाले दुर्गापूजा का त्योहार रचनात्मकता और कला के मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन करता है. बड़ाबाजार यंग बॉयज क्लब दुर्गापूजा कमेटी के सदस्य हमेशा से ही प्रासंगिक सामाजिक मुद्दों को अपने पूजा मंडप में थीम बनाने का प्रयास करती है. इस वर्ष भी यहां “मयूरपंखी नौका” थीम पर पूजा मंडप का निर्माण किया जा रहा है. यह पंडाल 40 फीट ऊंचा होगा.

बड़ाबाजार यंग बॉयज क्लब इस वर्ष 53वें वर्ष में पूजा का आयोजन कर रहा है. यह पूजा मंडप सेंट्रल कोलकाता में स्थित तारा चंद दत्ता स्ट्रीट के पास स्थित है, जो सेंट्रल एवेन्यू को रवींद्र सरणी से जोड़ती है. यह उत्सव स्थानीय लोगों में भी काफी लोकप्रिय है.

होगलो के पत्तों और सूखे मेवा की मदद से बनेगा पंडाल

कमेटी के मुख्य आयोजक राकेश सिंह ने कहा, “इस साल यंग बॉयज क्लब की तरफ से तैयार किए जा रहे दुर्गापूजा पंडाल को होगला के पत्तों, पाठकथी और सूखे मेवे के इस्तेमाल से मयूरपंखी नौका का आकार देने की कोशिश कर रहा है. 5 दिन तक चलनेवाले दुर्गापूजा उत्सव का इंतजार काफी बेसब्री से लोग करते हैं. कोविड -19 वैश्विक महामारी के कारण पिछले दो साल के अंतराल के बाद सिटी ऑफ जॉय के इस प्रमुख देश के सबसे बड़े त्योहारों में से एक को एक बार फिर से काफी उत्साह के साथ आयोजित करके खुशी हो रही है.

ये भी पढ़ें



पूजा पंडाल में दिखेगी विलुप्त होती हस्तशिल्प की झलकियां

यंग बॉयज़ क्लब के अध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा, “इस पंडाल में हस्तशिल्प कला की कई अनोखी और विलुप्त होती झलकियां देखने को मिलेंगी. पंडाल के भीतर दर्शकों को नवदुर्गा के कई मनमोहक अवशेष भी देखने को मिलेंगे. हमने अपनी पिछली पूजाओं में कई प्रमुख पेशेवर कलाकारों के साथ-साथ ग्रामीण कलाकारों को भी शामिल किया है, जिसके बाद हमने देखा है कि ग्रामीण कलाकारों और कारीगरों में जमीन पर प्रदर्शन करने की असाधारण क्षमता हैं. बता दें कि इस पूजा पंडाल की शुरुआत 1970 में हुई थी. मिदनापुर से देव शंकर महेश पंडाल का निर्माण कर रहे हैं. बता दें कि यूनेस्को ने कोलकाता के दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है. इस कारण पूजा आयोजकों में इस साल पूजा को लेकर विशेष उत्साह है और पूजा मनाने की जोरदार तैयारियां चल रही हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.