कोरोना महामारी की वजह से नेत्रदान में आई कमी, कॉर्निया ट्रांसप्लांट वालों की संख्या घटी

Eye Problems

भारत में लगभग 1.1 मिलियन लोग कॉर्नियल ब्लाइंड हैं और देश में वर्तमान वार्षिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट की संख्या केवल 25 से 30 हजार के बीच है. हर साल भारत में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित लगभग 75 हजार लोग आंखों की रोशनी पाने से जूक जाते हैं. इसका कारण कॉर्निया दान में कमी है. कोविड महामारी के बाद से तो स्थिति और भी अधिक खराब हो गई है. कोरोना महामारी के दौरान नेत्र दान की संख्या भी भारी कमी आई है. मार्च 2020 से अप्रैल 2021 तक महामारी के चरम के दौरान देश भर में केवल 18,358 कॉर्निया ट्रांसप्लांट हुए थे.

जयपुर के रावत आई एंड फेको सर्जरी सेंटर, निदेशक डॉ. हर्षुल टाक ने कहा कि लगभग 60 प्रतिशत लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हैं. इसलिए, नेत्रदान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि एक व्यक्ति के नेत्रदान से कम से कम 2 लोगों की मदद की जा सकती है. ईएनटीओडी फार्मास्यूटिकल्स के सीईओ निखिल के मसूरकर ने कहा कि नेत्रदान को लेकर कई सारे मिथक हैं जिन्हें तोड़ने की जरूरत है. लोगों को नेत्रदान के बारे में जागरूक करना होगा. मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है.

अगर हम सभी अपनी आंखें दान करने का संकल्प लें, तो हम एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा कर रहे लोगों का इलाज कर सकते हैं. आखें दान करने से लोगों के जीवन में रोशनी ला सकते हैं. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि अंग दान के महत्व के बारे में लोग जागरूक रहें. लोगों से अपील है कि वे नेत्रदान जरूर करें.

कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए लंबी वेटिंग

निखिल के मसूरकर ने कहा कि भारत में लगभग 11 लाख नेत्रहीन लोग कॉर्निया ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा में हैं. नेत्रदान के बारे में जागरूकता लाने के लिए एक अभियान चलाया गया. इसका उद्देश्य चारों ओर आंखें दान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना था. इसके जरिए लोगों को बताया गया कि वे नेत्रदान करें और लोगों में नेत्रदान करने की इच्छा बढ़ाएं. हालांकि यह एक राष्ट्रव्यापी अभियान था, लेकिन कम नेत्रदान वाले शहरों और नेत्र बैंक केंद्रों को विशेष रूप से लक्षित किया गया था, जिनमें पटना, रांची, जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए लखनऊ, भुवनेश्वर, जयपुर और चंडीगढ़ में नेत्रदान जागरूकता शिविर लगाए गए. सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया गया. देश में 30 मिलियन से ज्यादा लोगों को इस अभियान के जरिए जागरूक किया गया.

आंखें दान की शपथ लें

डॉ. हर्षुल टाक ने कहा कि अंधापन का बड़ा कारण क्षतिग्रस्त कॉर्निया है. कॉर्निया ट्रांसप्लांट के जरिए आंखों की रोशनी वापिस आ सकती है.आंखें दान करने में कोई समस्या नहीं है. इस प्रक्रिया में मरीज के खराब कॉर्निया के स्थान पर स्वस्थ कॉर्निया ट्रांसप्लांट लगा दिया जाता है. एक स्वस्थ व्यक्ति की आंखें दान से कई लोगों को रोशानी मिल सकती है.

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