केवल ऑस्ट्रेलिया के लोगों को महारानी के मुफ्त पोर्ट्रेट क्यों बांटे जा रहे हैं?

ऑस्ट्रेलिया में लोगों को सरकारी खर्चे पर महारानी की तस्वीर दी जा रही है. स्थानीय सांसद के ऑफिस में आवेदन करने के बाद उन्हें मुफ्त में तस्वीर दी जा रही है. जानिए, ऐसा क्यों किया जा रहा है…

महारानी के पोर्टेट के साथ पॉलिटिशंस एड्रयू हेस्‍टी, ऐसे ही पोर्टेट ऑस्‍ट्रेलिया में बांटे जा रहे हैं.

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ब्रिटेन में आज क्वीन एलिजाबेथ-II का अंतिम संस्कार किया जाएगा. शाही परंपराओं के मुताबिक, एक घंटे तक स्टेट फ्यूनरल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस दौरान 2 हजार मेहमान, 500 विदेशी शख्सियतें और 4 हजार से कर्मचारी मौजूद रहेंगे. महारानी के अंतिम संस्कार की तैयारियों की तस्वीरों और वीडियो के बीच उनकी एक पोर्ट्रेट भी इंटरनेट पर वायरल हो रही है.

इसकी वजह है ऑस्ट्रेलिया. दरअसरल, ऑस्ट्रेलियाई लोगों को सरकारी खर्चे पर महारानी की तस्वीर दी जा रही है. इतना ही नहीं, वो महारानी का पोर्ट्रेट पाने के लिए सांसद के ऑफिस से सम्पर्क कर सकते हैं. आवेदन करने के बाद उन्हें मुफ्त में महारानी की तस्वीर दी जा रही है. ऐसा क्यों किया जा रहा है, अब इसे भी समझ लेते हैं.

ऑफिस के बाहर आउट ऑफ स्टॉक के बोर्ड लगे

ऑस्ट्रेलियाई लोग महारानी के पोर्ट्रेट पाने के लिए स्वतंत्र हैं. इसके लिए वो अपने सांसद के ऑफिस में आवेदन कर रहे हैं. डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे आवेदन करने वालों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि ऑफिस के बाहर आउट ऑफ स्टॉक के बोर्ड लगाए गए हैं. ऑस्ट्रेलियाई सांसद डॉ. सोफी स्कैम्प्स के ऑफिस में ऐसी ही स्थिति बनी है.

उनके ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जब से महारानी की मौत की घोषणा की गई है, जब से 10 दिन के अंदर पोर्ट्रेट के लिए इतने आवेदन आए हैं कि वो आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं.डिमांड को पूरा करने के लिए ऐसी तस्वीरों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. इसका पूरा खर्च फाइनेंस डिपार्टमेंट उठा रहा है.

इसलिए सरकार को ऐसा करना पड़ा

ऑस्ट्रेलियाई सरकार को ऐसा संविधान के तहत करना पड़ रहा है. यहां के संविधान में ‘रिक्वेस्ट प्रोग्राम’ का जिक्र किया गया है, जिसके तहत नागरिकों को सरकार से राष्ट्र से जुड़ी चीजें मांगने का अधिकार है. इनमें राष्ट्राध्यक्ष या सम्राट की तस्वीर, राष्ट्रीय ध्वज और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रगान की सीडी जैसी चीजें शामिल हैं. यही वजह है कि सांसदों के ऑफिस के जरिए लोग आवेदन कर रहे हैं और महारानी का पोर्टेट उन्हें दिया जा रहा है.

जब सरकारी नियम बना विवाद की जड़

ऑस्ट्रेलिया के संविधान का यह नियम कई बार चर्चा में आया और बहस की वजह बना है. कई बाद यह विवादों में रहा है. पहले मार्च, 2012 में यहां के नेता बॉब ब्राउन इस पॉलिसी की आलोचना करते हुए इसके विरोध में प्रस्ताव भी लाए थे.उनका कहना था, अगर इतना ही ज्यादा अतिरिक्त पैसा उपलब्ध है जो उसे जरूरतमंद लोगों को देना चाहिए. मुझे लगता है यही प्राथमिकता है.

यह पहला मौका नहीं था, इससे पहले भी कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है, लेकिन सत्ता में रहे नेताओं ने संविधान का हवाला देते हुए इसे न बदलने की बात भी कही.

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