कृषि क्षेत्र में क्रांति का सूत्रपात है 10,000 एफपीओ बनाने की योजना

Fpo Scheme

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि 10 हजार एफपीओ (FPO-Farmer Producer Organization) बनाने की योजना कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति का सूत्रपात है. इस क्रांति के माध्यम से, बुआई से बाजार तक किसानों को सक्षम बनाकर उनकी आमदनी बढ़ाना सरकार का मकसद है. वो वृहस्पतिवार को किसान उत्पादक संगठन की स्कीम को सुचारू रूप से लागू करने के संबंध में क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों (सीबीबीओ) के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. मंत्री ने कहा कि एफपीओ से किसानों (Farmers) को समृद्ध बनाने के लिए सीबीबीओ को हर जतन करना होगा. एफपीओ की परिकल्पना तब पूरी होगी, जब एफपीओ बनने के बाद उसका लाभ किसानों को मिलने लगे तथा केसर (Saffron) की तरह उसकी खुशबू फैले.

तोमर ने अधिकारियों से कहा कि काम ऐसा होना चाहिए कि सारे किसान कहें कि हमें भी एफपीओ से जोड़िए. आगे नए एफपीओ गठन के लिए सरकार से मांग हो. सीबीबीओ को सरकार साधन दे रही है, जिससे अच्छे परिणाम आने चाहिए. इस मौके पर लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) की एमडी नीलकमल दरबारी ने सम्मेलन की भूमिका प्रस्तुत की. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिलक्ष लिखी ने सीबीबीओ से सरकार की अपेक्षाएं बताई. कार्यक्रम में नाबार्ड के चेयरमैन जीआर चिंताला ने स्कीम को लेकर कुछ सुझाव दिए.

क्या है सीबीबीओ की भूमिका

कृषि मंत्री ने कहा कि सीबीबीओ इसलिए बनाए गए हैं क्योंकि वे इस विषय में विशेषज्ञ हैं, जागरूकता फैला सकते हैं, किसानों को खेती में टेक्नोलॉजी दे सकते हैं, किसान अच्छा- गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करें, इस दृष्टि से मार्गदर्शन कर सकते हैं और किसानों को वाजिब दाम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. श्रेष्ठ एफपीओ के गठन के लिए सीबीबीओ को सभी को साथ लेकर कार्य करना चाहिए. योजना में पहले से ही तीन क्रियान्वयन एजेंसियों-नाबार्ड, एसएफएसी व एनसीडीसी सहित 13 एजेंसियों को नामित किया गया है.

एफपीओ स्कीम में खर्च होंगे 6,865 करोड़ रुपये

तोमर ने कहा कि देश में पहले लगभग 7 हजार एफपीओ बने थे, लेकिन अधिकतर टिकाऊ नहीं हो पा रहे थे, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) नई योजना लेकर आए. एफपीओ छोटे किसानों के संगठन हैं. इस पूरी योजना पर सरकार 6,865 करोड़ रुपये खर्च करेगी. देश में लगभग 86 प्रतिशत छोटे किसान हैं. जिन्हें एफपीओ के माध्यम से आदान उपलब्ध कराने से लेकर प्रोसेसिंग व उपज की बाजार में उचित दाम पर बिक्री में सहयोग जैसी सुविधाएं दिलाना सरकार का उद्देश्य है. एफपीओ किसानों की संगठन शक्ति के प्रतीक हैं.

इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से बदलेगी सूरत

तोमर ने कहा कि आज हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, इसमें हमें पुराने संकल्प पूरे करना है और नए संकल्प लेकर आगे बढ़ना है. देश में खेती को उन्नत बनाने, असंतुलन दूर करने व किसानों की माली हालत सुधारने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार हरसंभव उपाय कर रही है. किसानों की सुविधा के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी की गई हैं. एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इंफ्रास्ट्रक्टर फंड से किसानों के लिए सरकार गांव-गांव सुविधाएं जुटाने के लिए प्रयत्नशील है.

एफपीओ स्कीम में महत्वपूर्ण कड़ी हैं सीबीबीओ

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि एफपीओ की स्कीम में सीबीबीओ महत्वपूर्ण कड़ी हैं. ये ठान लें तो उद्देश्य की प्राप्ति जरूर होगी. कुल मिलाकर, उद्देश्य यह है कि किसानों को लाभ पहुंचे. चौधरी ने एफपीओ से अधिकाधिक किसानों को जोड़े जाने की अपेक्षा जताई और कहा कि इस संबंध में सरकार द्वारा बनाई गई गाइड लाइन के अनुसार कार्य किया जाना चाहिए.साथ ही केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी भी एफपीओ के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए.

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