कार्तिकेय सिंह को मिलेगी बेल या जाएंगे जेल फैसला आज, अभी फरार हैं पूर्व कानून मंत्री

बिहार के पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह पर लगे अपहरण मामले में आज कोर्ट में सुनवाई होगी. कार्तिकेय सिंह अभी फरार चल रहे हैं.

फरार है बिहार के पूर्व कानून मंत्री

Image Credit source: File photo

महागठबंधन सरकार की फजीहत कराने वाले पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह मामले में आज कोर्ट में सुनवाई होगी. जिसके बाद तय होगा कि पूर्व मंत्री कार्तिकेय सिंह को कोर्ट से राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढेगी. उनके खिलाफ बिल्डर राजू सिंह अपहरण केस में कोर्ट मे सुनवाई होनी है. नीतीश कुमार के पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह गिरफ्तारी के डर से फरार चल रहे हैं. जिसके बाद पटना पुलिस ने दानापुर की कोर्ट में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट के लिए अर्जी लगाई है

इससे पहले र्व मंत्री कार्तिकेय सिंह के मामले में 14 सितंबर को मामले पर सुनवाई होनी थी लेकिन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अजय कुमार के छुट्टी चले जाने के कारण सुनवाई नहीं हो पाई थी. और अब आज जब इस मामले पर सुनवाई होनी है तब सबकी नजर इसपर टिकी हुई है कि कोर्ट पूर्व मंत्री के खिलाफ नन बेलेवल वारंट जारी करेगी या फिर उन्हें राहत मिलेगी.

पूर्व कानून मंत्री पर अपहरण का आरोप

दरअसल नई महागठबंधन सरकार में कानून मंत्री बने कार्तिकेय सिंह पर साल 2014 में राजीव रंजन नामक शख्स को अगवा करने का आरोप है. मामले में अनंत सिंह और कार्तिकेय सिंह को आरोपी बनाया गया है और कोर्ट ने कार्तिकेय सिंह के खिलाफ वारंट जारी किया था. इस बीच जब बिहार में नई सरकार बनी तब कार्तिकेय सिंह को बिहार का कानून मंत्री बना दिया गया. जिस दिन उन्हें राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेनी थी उसी दिन कोर्ट में भी सरेंडर करना था.

ये भी पढ़ें



बीजेपी ने बताया था जंगलराज

इसके बाद बीजेपी ने कार्तिकेय सिंह को मंत्री बनाए जाने को बिहार में जंगलराज की वापसी बताया और इसे कानून के साथ मजाक कहा था. सरकार पर बन रहे बीजेपी के लगातार दबाव के बाद कार्तिकेय सिंह को कानून मंत्री से हटा कर उन्हे गन्ना उद्योग मंत्री बना दिया था. विभाग बदले जाने के कुछ घंटे बाद ही कार्तिक कुमार ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इधर मामले में दानापुर कोर्ट में सुनवाई हुई जिसके बाद अदालत ने कार्तिकेय सिंह की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published.