कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हाशमी के करीबी वसीम-अनस की अवैध इमारतें सील, मुख्तार बाबा के परिवार पर रिपोर्ट दर्ज

Kanpur Violence 2

उत्तर प्रदेश के कानपुर में तीन जून को हुई हिंसा (Kanpur violence) को लेकर अब जिला प्रशासन सख्त है और हिंसा के आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. कानपुर विकास प्राधिकरण (Kanpur Development Authority) के प्रवर्तन टीम ने गुरुवार को शारदा नगर में कानपुर हिंसा के आरोपी जफर हयात हाशमी (Zafar Hayat Hashmi) के करीबी वसीम अहमद और अनस अली की इमारतों को भी सील कर दिया. जानकारी के मुतबिक दोनों इमारतों का निर्माण अवैध रूप से किया गया था. इस दौरान वहां पर भारी पुलिस बल की मौजूद था. बताया जा रहा है कि वसीम और अनस के संबंध नई सड़क हिंसा के आरोपी हयात जफर से भी थे.

जानकारी के मुताबिक केडीए वीसी अरविंद सिंह के निर्देश पर ओएसडी अवनीश सिंह के नेतृत्व में टीम शारदा नगर पहुंची। यहां शिवपुरी में वसीम अहमद के प्लॉट नंबर 117/पी-1/403 और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के सामने अनस अली के प्लॉट 117/क्यू/506 को सील कर दिया गया. बताया जा रहाहै कि अनस अली की बिल्डिंग को सील करने का आदेश चीफ इंजीनियर रोहित खन्ना ने 17 जून 2022 को दिया था और वहां पर 250 वर्ग मीटर के प्लॉट पर ग्राउंड फ्लोर से 10 फीट गहरी खुदाई कर बेसमेंट बनाने के लिए आरसीसी कॉलम की शटरिंग लगाई जा रही है. केडीए के इंजीनियरों के मुताबिक पूरा निर्माण छिपाया जा रहा है. इसको लेकर केडीए ने 11 फरवरी 2021 को अपनी पहली सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के बाद एक नोटिस जारी किया था और काम रोकने को कहा गया था. लेकिन इसे रोका नहीं गया.

बाबा बिरयानी के मालिक मुख्तार बाबा के पूरे परिवार पर रिपोर्ट दर्ज

कानपुर हिंसा में जफर हयात हाशमी को फंडिंग करने के आरोपी बाबा बिरयानी के मालिक मुख्तार अहमद उर्फ मुख्तार बाबा की मुश्किलें बढ़ गई हैं. मुख्तार पुलिस हिरासत में है और अब उसके पूरे परिवार पर शत्रु संपत्ति हथियाने का मामला दर्ज किया गया है. गुरुवार को बजरिया और चमनगंज थाने में बाबा और उनके परिवार के सदस्यों सहित 26 लोगों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गई.

जिस मंदिर के बाहर बनाता था पंचर मुख्तार उसी पर कर लिया कब्जा

बताया जा रहा है कि मुख्तार के परिवार द्वारा दो मंदिरों पर कब्जा करने के मामले भी सामने आ रहे हैं.पुलिस इस संबंध में मुख्तार का बयान जेल में दर्ज करेगी. जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहली रिपोर्ट शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति के सचिव आदिबुल कादर ने दायर की थी और दूसरी रिपोर्ट रामजानकी मंदिर के पूर्व किरायेदार एहसानुल हक अंसारी ने दर्ज कराई है. जबकि तीसरी रिपोर्ट उदय शंकर निगम ने दर्ज कराई है. बताया जाता है कि मुख्तार पहले रामजानकी मंदिर के बाहर पंचर लगाता था और बाद में उसने पूरे मंदिर पर कब्जा कर उसमें बिरयानी की दुकान खोल दी.

Similar Posts