कल भारत दौरे पर आएंगे ब्रिटेन के पीएम जॉनसन, चीन-पाक पर दोटूक बात कर सकते हैं PM मोदी

Boris Johnson

नई दिल्ली. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) 21 अप्रैल को भारत दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरान वह गुजरात भी जाएंगे. इसके बाद शुक्रवार को दिल्ली में उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के बीच बातचीत होगी. माना जा रहा है कि इस दौरान पीएम मोदी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) के मुद्दे पर दोटूक बातचीत कर सकते हैं. कहा जा रहा है कि जॉनसन से बातचीत के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती देने के लिए नई राह खुलेगी.

बोरिस जॉनसन के दौरे के दौरान भारत को उम्मीद रहेगी कि ब्रिटेन पाकिस्तान और चीन को लेकर अपने रुख की समीक्षा करेगा. भारतीय अफसर पाकिस्तानी सेना के साथ ब्रिटेन के लंबे जुड़ाव और पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने के बावजूद ब्रिटेन के कुछ ना कहने से निराश रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि भारत की ओर से जॉनसन के साथ यूक्रेन युद्ध पर एक स्पष्ट चर्चा की जाएगी. साथ ही तालिबान और हक्कानी आतंकवादियों को अफगानिस्तान में सत्ता कब्जाने में मदद करने और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान और ब्रिटेन की सेना के जुड़ाव का मुद्दा भी उठाए जाने की पूरी संभावना है.

पाकिस्तानी आतंकवाद का उठेगा मुद्दा
इस समय अफगानिस्तान से वापस जा रही गठबंधन सेनाओं की ओर से छोड़े गए खतरनाक हथियार पाकिस्तानी आतंकियों के हाथ लग रहे हैं. इसके कारण भारत को जम्मू-कश्मीर में नाइट विजन डिवाइस और एम-4 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल करने वाले जिहादियों के साथ ही पाकिस्तानी आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है.

ब्रिटेन बढ़ा रहा है रणनीति
ब्रिटेन चाहता है कि यूक्रेन युद्ध में भारत रूस के खिलाफ उतर जाए. इसके लिए ब्रिटेन की ओर से प्रयास भी किए जा रहे हैं. ब्रिटेन इस क्षेत्र में रणनीति को भी बढ़ावा देने में जुट गया है. इस बीच ब्रिटेन चीन से व्यापार को प्राथमिकता पर रख रहा है. वहीं ब्रिटेन बांग्लादेश में भी संभावनाएं तलाश रहा है. वह खालिदा जिया की विपक्षी पार्टी बीएनपी के साथ संबंधों का समर्थन कर रहा है तो वहीं प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के साथ अपने संबंधों को लेकर पीछे हट रहा है.

किसान आंदोलन और माल्या के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठेगा
देश में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन में ब्रिटेन के खालिस्तानी समर्थकों से विदेशी फंडिंग मिलने का मुद्दा भी बोरिस जॉनसन के दौरे के समय भारत की ओर से उठाया जाएगा. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अफसरों ने उस दौरान ब्रिटेन के अपने सुरक्षा अफसरों से किसान आंदोलन के समय का यह मुद्दा उठाया था. लेकिन इसके बावजूद ब्रिटेन में किसान आंदोलन के लिए फंड एकत्र किए जा रहे थे. वहीं ब्रिटेन अपने यहां कुछ रूसी लोगों की संपत्ति को फ्रीज करने की कार्रवाई कर रहा है, जबकि उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामले नहीं हैं. भारत के दो भगोड़ों विजय माल्या और नीरव मोदी ब्रिटेन में रह रहे हैं, लेकिन उनके प्रत्यर्पण को लेकर उसकी ओर से भारतीय कानून के विश्लेषण की बात कही जाती है. ऐसे में भारत सरकार दोनों भगोड़ों के प्रत्यर्पण में ब्रिटेन की ओर से सहयोग चाह रही है.

भारत में निवेश की घोषणाएं संभव
गुजरात में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ब्रिटेन और भारत के प्रमुख उद्योगों में बड़े निवेश की घोषणा कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों में रोजगार बढ़ाने और विकास करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा अत्याधुनिक साइंस, हेल्थ सेक्टर और तकनीक क्षेत्र में भी नए सहयोग की घोषणा भी की जा सकती है. वहीं 22 अप्रैल को मुलाकात के दौरान पीएम मोदी और बोरिस जॉनसन ब्रिटेन और भारत के बीच रणनीतिक रक्षा, कूटनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर गहन बातचीत करेंगे. ब्रिटेन के अनुसार इसका मकसद साझेदारी को मजबूत बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को प्रगाढ़ करना है.

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