ओडिशा: झोलाछाप डॉक्टर को छोड़ने पर एएसआई निलंबित, 75 साल के बुजर्ग को लगा दिया जानवरों का इंजेक्शन

ओडिशा पुलिस (Odisha Police) ने गुरुवार को मयूरभंज जिले (Mayurbhanj) में एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा एक व्यक्ति को पशुओं को लगने वाला इंजेक्शन लगाने के कथित मामले में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक उप निरीक्षक को निलंबित कर दिया. मयूरभंज के एसपी (SP) खिलाड़ी ऋषिकेश ज्ञानदेव ने महुलडीहा थाने में तैनात एएसआई पबित्र मोहन राउत को निलंबित कर दिया. एएसआई पर आरोप है कि उन्होंने स्थानीय लोगों द्वारा पशुओं को दिया जाने वाला इंजेक्शन आदमी को लगाने के एक प्रकरण में झोलाछाप डॉक्टर को पुलिस के हवाले किया था, लेकिन राउत ने उसे जाने दिया.

क्योंझर जिले के कांतिपाल के बिश्वनाथ बेहरा (62) के रूप में पहचाने जाने वाले झोलाछाप डॉक्टर ने 16 अप्रैल को पीठ दर्द से पीड़ित 55 वर्षीय श्रीकांत मोहंता को तीन पशुओं के इंजेक्शन दे दिए थे. इसके अलावा उसने मोहंता को कुछ गोलियां भी दीं और उसे दिन में दो बार सेवन करने का सुझाव दिया. बिश्वनाथ ने जानवरों वाला इंजेक्शन लगाने के लिए मरीज से 470 रुपये वसूले थे. संयोग से, पशु दवा लेने के बावजूद रोगी पर ऐसा कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा. हालांकि, मरीज के बेटे को बिश्वनाथ पर झोलाछाप डॉक्टर होने का शक था. उसने ठाकुरमुंडा के एक डॉक्टर को इंजेक्शन की तस्वीर भेजी, जिन्होंने पुष्टि की कि इंजेक्शन जानवरों को दिया जाता है.

क्या था पूरा मामला

महुलडीहा थाना पुलिस ने झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. एएसआई से जाने की अनुमति मिलने के बाद वे फरार हो गया था. फिलहाल पुलिस ने फरार झोलाछाप डॉक्टर की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है.बता दें एक दिन क्योंझर जिले के कांतिपाल निवासी और खुद को डॉक्टर कहने वाला विश्वनाथ बेहरा उसके घर आए और कहा कि वह उनके लिए भुवनेश्वर से दवा और इंजेक्शन लेकर आए हैं. दवा के सेवन और इंजेक्शन से फौरन ही उन्हें पीठ के दर्द से छुटकारा मिल जाएगा. अब मोहंता पीठ दर्द से तो थे ही परेशान. विश्वनाथ को देख ऐसा लगा कि अब उन्हें दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा. वे विश्वनाथ से इंजेक्शन लगवाने के लिए तैयार हो गए.

मोहंता की हां सुनते ही विश्वनाथ ने फटाफट तीन इंजेक्शन लगा दिए. हर इंजेक्शन की कीमत 500 रुपये थी. साथ ही अगले तीन दिन तक छह गोलियां खाने के लिए भी दी और फीस के नाम पर 400 रुपये ले लिए. अगले दिन सुबह-सुबह मोहंता को बेचैनी और बुखार महसूस हुआ. ऊपर से दस्त भी शुरू हो गया. इसके बाद उनके बेटे ने उन्हें फौरन ठाकुरमुंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. मोहंता की हालत गंभीर थी, लिहाजा डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर दिया.

पहले भी एक शख्स को दे चुका था पशुओं का इंजेक्शन

सही समय पर अस्पताल पहुंचने से मोहंता की जान बच गई और उन्हें अगले दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. जब मामला पुलिस तक पहुंचा तो झोलाछाप डॉक्टर विश्वनाथ फरार हो गया. पुलिस का कहना है कि आरोपी डॉक्टर ने पहले भी माहुलडीहा गांव के रहने वालों को पशुओं का इंजेक्शन लगाया था.

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