एक ऐसा मंदिर जहां होती है गिद्ध जोड़े की पूजा, दर्शन को आते हैं हजारों लोग

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक ऐसा मंदिर है. जहां मूर्तियां तो स्थापित हैं, लेकिन वह किसी देवी-देवताओं की नहीं बल्कि विलुप्त हो रहे गिद्ध जोड़े की. यह अनोखा मंदिर गिद्ध जोड़े की प्रेम कहानी को दर्शाता है. इस मंदिर को लोग गिद्ध सती मंदिर के नाम से पुकारते हैं. यहां हर रोज दर्जनों लोग आकर पूजा पाठ करते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं. पूजा-पाठ करने वाले लोग दावा करते हैं कि यहां उनकी मांगी हर मुराद पूरी होती है. मंदिर प्रांगण में हर बरस एक महीने का मेला भी लगता है. जिसमें पड़ोसी देश नेपाल तक के लोग आते हैं.

लखीमपुर खीरी जिले की सदर तहसील क्षेत्र के कोठीला ग्राम पंचायत में लखीमपुर से पड़ोसी देश नेपाल की सीमा तक जाने वाले मार्ग के किनारे एक भव्य मंदिर बना हुआ है. इस मंदिर में दो मूर्तियां स्थापित हैं, लेकिन यह मूर्तियां किसी देवी-देवताओं की नहीं बल्कि गिद्ध जोड़े की हैं.

प्रेमी गिद्ध के शव के पास ही मादा गिद्ध ने भी दम तोड़ा

स्थानीय लोग दावा करते हैं कि करीब 65 साल पूर्व सन 1962 के जुलाई महीने में गांव से कुछ दूरी पर नहर के किनारे एक पशु की मौत हो गई थी. जिसे खाने के लिए गिद्धों का झुंड आ गया था. जानवर का मांस खाने के बाद सभी गिद्ध उड़ गए, लेकिन एक वहीं पर एक गिद्ध की मौत हो गई थी. दावा किया जा रहा है कि गिद्ध की मौत के बाद दूसरा गिद्ध (मादा) भी मौजूद रहा. साथी गिद्ध की मौत के बाद दूसरे मादा गिद्ध ने भी खाना पीना छोड़ दिया था. यह देख कर वहां कई दिन तक लोगों का जमावड़ा रहा.

स्थानीय लोग बताते हैं कि जिंदा गिद्ध मृत गिद्ध की लाश पर बैठा रहता था. यदि उसे कोई हाथ से छूकर हटाता था और कुछ खाना पानी देता था तो वह कुछ खाए बिना ही वहां से थोड़ी दूर पर नहर में जाकर स्नान करता था और फिर लौट कर मृत गिद्ध के शव पर आ जाता था. यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा था. करीब 10 दिनों के बाद दूसरे गिद्ध ने भी अपने साथी गिद्ध की लाश के पास ही दम तोड़ दिया. गिद्ध जोड़ो के बीच की प्रेम कहानी क्षेत्र के हर बुजुर्ग और जवान की जुबान पर रटी हुई है.

नर गिद्ध के वियोग में प्राण त्याग सती हो गई मादा गिद्ध

गांव के बुजुर्ग रमाकांत वर्मा सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि अपने साथी गिद्ध की मौत के बाद मादा गिद्ध ने भी वहीं पर अपने प्राण त्याग दिए थे. जिससे माना गया की मादा गिद्ध ने नर गिद्ध के वियोग में अपने प्राण त्याग कर सती हो गई. इसके बाद गांव वालों ने दोनों मृतक गिद्धों के शवों का विधि विधान से गांव के पास ही अंतिम संस्कार कर दिया गया. साथ ही एक छोटा मंदिर भी बना दिया. जिसमें दोनों गिद्धों की मूर्तियां रखी गई. आगे चलकर यहां काफी लोग श्रद्धा भाव से आने लगे. पूजा पाठ होने लगी. जिसके बाद गांव वालों ने मिलकर भव्य मंदिर बना दिया और उसमें दो गिद्धों की मूर्तियों को स्थापित करा दिया.

छात्र परीक्षा में जाने से पहले इसी मंदिर में मांगते हैं मन्नत

सती मंदिर अब आस्था का केंद्र बन गया है. मां सती मेला कमेटी के अध्यक्ष रंजीत कुमार बताते हैं कि सती मंदिर पर हर साल मेला लगता है. यह मेला एक महीने तक चलता है. जिसमें काफी दूरदराज के लोग आते हैं. कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं. साथ ही भंडारे आदि का भी आयोजन किया जाता है. इस मेले में नेपाल देश तक के लोग आते हैं. खास बात यह है कि इस मंदिर में रविवार के दिन ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. पूजा अर्चना करते हैं और अपनी मन्नते मगते हैं. कई श्रद्धालुओं का दावा है कि यहां उन्होंने जो मुराद मांगी वह पूरी हुई है. एक युवक का दावा है कि क्षेत्र के छात्रों कि जब परीक्षा होती है तो वह इस मंदिर में आकर परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने की मनौती मांगते हैं.

गिद्ध जोड़ें की प्रेम कहानी से शायद यही सिद्ध हो रहा है कि इंसान ही एक दूसरे से प्यार नहीं करते बल्कि पशु पक्षियों में भी अगाध प्रेम भावना होती है. एक गिद्धन अपने साथी गिद्ध के वियोग में उसकी लाश पर ही प्राण त्याग दिए. यह दास्तां दो पक्षियों के बीच की प्रेम कहानी को साबित करता है. दो पक्षियों के बीच की मोहब्बत को भांप कर लोगों ने इस अनोखी प्रेम कहानी को जिंदा रखने के लिए एक भव्य मंदिर बना डाला और उस मंदिर में गिद्ध प्रेमी जोड़े की मूर्तियां लगाकर उसे आस्था का केंद्र बना दिया. जहां हर रोज दर्जनों लोग जाते हैं. फूल चढ़ाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे देवी देवताओं के मंदिर में जाकर श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं. शायद इसीलिए यह सती मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.