ऋषभ पंत का खराब T20I रिकॉर्ड भारतीय प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह पर सवाल खड़े करता है

Rishabh Pant Wasim Jaffer

निखिल नारायण.

जहां ‘फिनिशर’ के रूप में दिनेश कार्तिक की नई भूमिका दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ड्रॉ हुई टी20 सीरीज में भारत के लिए सफलता की सबसे बड़ी कहानी थी, वहीं अंतरिम कप्तान और देश के प्रमुख पसंदीदा विकेटकीपर का फॉर्म भारतीय थिंक-टैंक और मैनेजमेंट के लिए चिंता का विषय रहा होगा. ऋषभ पंत (Rishabh Pant) बल्लेबाजी के मामले में खराब फॉर्म में थे, उन्होंने 14.5 की खराब औसत और 105.45 की स्ट्राइक रेट से केवल 58 रन ही बनाए. उनका उच्चतम स्कोर 29 रहा. बाएं हाथ के घातक बल्लेबाज का T20I में भारत के लिए कोई बड़ा रिकॉर्ड नहीं है और आईपीएल के 15वें एडिशन के इस सीजन में भी उनके कारनामे निचले स्तर के रहे. अब इंडियन XI में दिनेश कार्तिक की जगह पक्की होने और विराट कोहली (Virat Kohli) और सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) की राष्ट्रीय टीम में वापसी की तैयारी के बीच पंत के लिए मिडिल आर्डर में जगह बनाना मुश्किल होगा.

पंत ने दक्षिण अफ्रीका सीरीज में किया बेहद खराब प्रदर्शन

पंत की दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज काफी खराब रही, जिसमें 29, 5, 6 और 17 के स्कोर के साथ पूरी की गई चार पारियों में से तीन में विफल रहे. जो बात इन आंकड़ों को बदतर बनाती है, वह यह है कि विकेटकीपर-बल्लेबाज नंबर 4 पर बल्लेबाजी कर रहे थे और उनके पास अपनी पारी खेलने और बाद में अपनी गति को तेज करने का पर्याप्त समय था. लेकिन वे असफल रहे. न तो उन्होंने बड़े स्कोर बनाए और न ही कोई स्कोरिंग पारी खेली. यह राहुल द्रविड़ एंड कंपनी के लिए चिंता का विषय होगा. पंत बीच के ओवरों में भी आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करते दिखे. खासकर यह देखते हुए कि वे नंबर 4 पर बल्लेबाजी कर रहे हैं, वे अक्सर खेल के 7-16 फेज के बीच बल्लेबाजी करने के लिए आते हैं. लेकिन वे अपनी पारी की शुरुआत में कई गेंदों का फायदा उठाने में जल्दबाजी नहीं करते: कटक में 7वें ओवर में बल्लेबाजी करने के लिए 7 गेंदों में 5, विशाखापत्तनम में 13वें ओवर में 8 में से 6 और राजकोट में तीसरे ओवर में 23 गेंदों में 17 के साथ पंत ने सीरीज में अपने निर्धारित स्थान के लायक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं किया.

पंत का स्ट्राइक रेट चिंता का विषय

इस साल 17 टी20 मैचों में बीच के ओवरों में बाएं हाथ के बल्लेबाज का स्ट्राइक रेट औसत से कम 136.09 रहा, जो अन्य भारतीय बल्लेबाजों की तुलना में भी कम है जिनके मिडिल ओवर स्पॉट पर सवाल खड़े किए जाते हैं: खेल के 7-16 फेज में राहुल त्रिपाठी का स्ट्राइक रेट 160 का है. संजू सैमसन ने 144.34, दीपक हुड्डा ने 139.24 और श्रेयस अय्यर ने 137.12 के स्ट्राइक रेट हासिल किए. पंत बार-बार ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को खेलते हुए आउट हुए. इस सीरीज की चार पारियों में तीन बार उन्हें उसी तरह से आउट किया गया – दो बार केशव महाराज और एक बार फिर एनरिक नॉर्टजे को. वास्तव में, उन्हें इस साल 20 पारियों में 10 बार इसी तरह से आउट किया गया यानी उन्होंने आधे मौकों पर बल्लेबाजी की. इसका मतलब है कि वे अक्सर ऑफ स्टंप के बाहर धीमी गति की वाइड डिलीवरी पर आउट हुए. इन गेंदों का सामना करने के मामले में बाएं हाथ का बल्लेबाज अपना पूरा नियंत्रण खो देते हैं और बिना किसी पावर या टाइमिंग का ख्याल रखे गेंद को हवा में उछालकर कैच थमा देते हैं.

कुल मिलाकर पंत का T20I क्रिकेट में भारत के लिए कोई बहुत बढ़िया रिकॉर्ड नहीं है – 42 पारियों में 23.15 की औसत से सिर्फ 741 रन और 123.91 की बेहद खराब स्ट्राइक रेट. वास्तव में, यह क्रिकेट के इस फॉर्मेट के इतिहास में गौतम गंभीर के बाद किसी भारतीय बल्लेबाज (न्यूनतम 500 रन) के लिए दूसरी सबसे कम स्कोरिंग रेट है. वे इस फॉर्मेट में बल्लेबाजी करने वाली लगभग आधी पारियों 42 में से 20 में विफल रहे हैं, जो कि विफलता की काफी हाई रेट है, क्योंकि उन्होंने भारत के लिए 42 पारियों में से 35 में नंबर 4 और 5 पर बल्लेबाजी की है. पंत ने अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में सिर्फ तीन अर्द्धशतक पूरे किए हैं और देश के लिए खेलते समय मुश्किल से पांच प्रभावशाली पारियां खेली हैं – यह हर आठ पारियों में एक हाई-इम्पैक्ट परफॉरमेंस है जो टॉप ऑर्डर में अपने क्षमता की बल्लेबाजी करने वाले बैट्समैन के लिए बहुत सामान्य है.

पिछले दो सालों में गिरा पंत का प्रदर्शन

पंत ने 2017 और 2019 के बीच आईपीएल में भारी सफलता का स्वाद चखा, जिसमें 44 मैचों में 38.45 की औसत से 1,538 रन बनाए और इससे भी महत्वपूर्ण है 10 अर्द्धशतक और एक शतक के साथ 168.08 का उनका स्ट्राइक रेट. इन तीनों सीजन में उन्होंने 160 से ऊपर की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की जिसकी बदौलत वे इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में सबसे खतरनाक और डराने वाले बल्लेबाजों में से एक बन गए. लेकिन अगले दो एडिशन में बाएं हाथ के इस बल्लेबाज के स्कोर में नाटकीय गिरावट देखी गई. हालांकि उन्होंने कुल 343 और 419 का स्कोर किया, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 2020 और 2021 में चौंकाने वाले स्तर 113.95 और 128.52 तक गिर गया. इस सीजन में पंत इसे लगभग 152 तक ले गए, लेकिन ‘दिल्ली कैपिटल्स’ के लिए एक भी मैच में शानदार प्रदर्शन करने के लिए पर्याप्त समय तक नहीं टिक पाए. उन्होंने टूर्नामेंट में एक भी अर्धशतक नहीं बनाया.

पंत को प्लेइंग इलेवन में जगह हासिल करने के लिए करना होगा संघर्ष!

आईपीएल 2022 में आरसीबी (183.33 के स्ट्राइक रेट से 330 रन) और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई सीरीज़ में भारत के लिए ‘फिनिशर’ के रूप में अपनी नई भूमिका में कार्तिक शानदार फॉर्म में हैं और टॉप आर्डर में केएल राहुल (KL Rahul) की वापसी के बाद ऋषभ पंत तीसरे विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर प्लेइंग-11 में जगह पाने के लिए संघर्ष कर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप (T20 World Cup) के लिए संभावित प्लेइंग-11 में सलामी बल्लेबाज के रूप में रोहित शर्मा और राहुल, तीसरे नंबर पर कोहली, नंबर 4 पर सूर्यकुमार, 5 पर हार्दिक पांड्या, 6 पर कार्तिक, 7 पर रवींद्र जडेजा और उसके बाद युजवेंद्र चहल, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और शायद भुवनेश्वर कुमार या दीपक चाहर में से कोई हो सकते हैं. पंत इस भारतीय प्लेइंग इलेवन में कहां फिट होते हैं?

द्रविड़ को पंत पर भरोसा लेकिन रन तो बनाने ही होंगे

भारत के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने जोर देकर कहा है कि पंत टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भी बल्लेबाजी क्रम का अहम हिस्सा बने रहेंगे. जबकि टेस्ट और वन-डे मैचों में उनके परफॉरमेंस की तरह टी20 में वे कभी भी एक पावरहाउस और एक ताकत के रूप में गिने जाने वाले नहीं रहे हैं. आक्रामक लेग स्पिनरों और बीच के ओवरों में धीमे बाएं हाथ के सधे हुए गेंदबाजों का मुकाबला करने के लिए एक लेफ्ट-हैंड बल्लेबाज की जरूरत के बारे में बात करना आवश्यक है, लेकिन यह केवल तभी काम करता है जब पंत इस फॉर्मेट में बल्लेबाज के तौर पर न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करते हों. पंत की खेलने की शैली नंबर 4 पर बैटिंग के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है – यह उन्हें क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में कंफ्यूज कर रहा है. उन्हें अपने नियमित गेम में वापस जाने की जरूरत है, जो कि टी-20 फॉर्मेट के क्रिकेट में तभी संभव है जब वे 14-15 ओवर में बल्लेबाजी करने के लिए आते हैं. इसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि उन्हें नंबर 5 या 6 से फिनिशर की भूमिका में आना होगा. हालांकि, वर्तमान में उन स्लॉट्स के लिए कड़ी चुनौती है और पंत इस मामले में काफी नीचे हैं.

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