उदयपुर कांग्रेस चिंतन शिविर : बीजेपी से मुकाबला करने के लिए पार्टी ने अपनाई बारीक रणनीति

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उदयपुर में चिंतन शिविर (Udaipur Congress Chintan Shivir) का उद्देश्य कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के भीतर एक वैचारिक और संगठनात्मक मंथन करना है. 3 दिनों तक चलने वाली इस चर्चा से कई तरह के विचार आने की उम्मीद है. चुने हुए 430 नेताओं का एक समूह उदयपुर की शुष्क पहाड़ियों पर बसे कार्यक्रम स्थल में चर्चा करेगी. कई चुनावी उलटफेरों के बावजूद, कांग्रेस पार्टी इसको लेकर पूरी तरह से उत्साहित दिख रही है और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करती दिख रही है. इसी तरह का एक विषय है बीजेपी के आक्रामक राष्ट्रवाद का मुकाबला करने के लिए ‘छद्म’ शब्द का इस्तेमाल करना. छद्म शब्द 20 साल के अंतराल के बाद राजनीति में वापसी कर रहा है. पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 1980 के दशक की शुरुआत में इस वाक्यांश का इस्तेमाल धर्म के मुद्दे पर कांग्रेस के लिए किया था.

इस शब्द का इस्तेमाल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आंतरिक आपातकाल (1975-77) लगाने की अवधि के दौरान संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को सम्मिलित करने के जवाब में किया गया था. कांग्रेस ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने के लिए छद्म शब्द का इस्तेमाल किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी ने हमेशा राष्ट्रवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कांग्रेस को घेरा है. इसके अलावा कांग्रेस के चिंतन शिविर में रक्षा और विदेश मामलों के विषयों को शामिल न करने पर उसे सार्वजनिक आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा. हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मलिकार्जुन खड़गे ने यह घोषणा किया है कि कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक विषय समिति में रक्षा और विदेश मामलों को शामिल किया है.

कांग्रेस सांस्कृतिक देश भक्ति के बजाय संवैधानिक देशभक्ति पर जोर देगी

चिंतन शिविर में आज एक प्रेस रिलीज पढ़ी गई जिसमें कहा गया, “यह वास्तविक राष्ट्रवादियों बनाम छद्म राष्ट्रवादियों के बीच की लड़ाई है. जो लोग कांग्रेस के सिद्धांतों के साथ खड़े होते हैं, वह भारतीय जीवन शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं और सोचते हैं कि इस सभ्यता को कैसे 3000 वर्षों से बनाए रखा गया है. जबकि बीजेपी और आरएसएस का राष्ट्रवाद नकली है. यह कांग्रेस पार्टी ही है जो सभी एक्सट्रीमिस को खारिज कर भारतीय मार्ग का पालन करती है. यह चिंतन शिविर स्पष्ट संदेश देगा कि राष्ट्रवाद और भारत के लिए प्रेम ही कांग्रेस का मूल दर्शन है.” यह स्पष्ट है कि कांग्रेस बीजेपी द्वारा समर्थित सांस्कृतिक देश भक्ति के बजाय संवैधानिक देशभक्ति पर जोर देगी.


चिंतन शिविर में दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु विकास संगठन के भीतर किसी पद पर एक व्यक्ति द्वारा लिए जा सकने वाले अधिकतम समय के सहमति से था. कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने कहा कि एक पद छोड़ने वाले को 3 साल की कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरना होगा. यानी इस बीच उसे कोई पद नहीं दिया जाएगा. विशेष रूप से पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सिद्धांत गांधी परिवार पर भी लागू होगा या नहीं. एक परिवार एक टिकट के मुद्दे पर पार्टी ने मुखरता से अपनी बात रखी है. अजय माकन ने कहा कि पार्टी के लिए सक्रिय रूप से 5 साल काम करने के बाद ही किसी व्यक्ति को पार्टी के टिकट के लिए योग्य माना जाएगा. कांग्रेस चिंतन शिविर के बाद बड़े सुधारों की घोषणा हो सकती है. शिविर का समापन रविवार 15 मई को सोनिया और राहुल गांधी के समापन भाषण के साथ होगा.


शिविर में चर्चा का केंद्र गठजोड़ की तुलना में संगठनात्मक मुद्दों पर ज्यादा केंद्रित होने की उम्मीद है. इसी वजह से जब TV9 ने पूछा कि क्या आप कांग्रेस की राजनीतिक विरोधी बीजेपी के खिलाफ खड़ी होने वाली पार्टियों के सहयोगी के तौर पर उभरेंगे तो इस पर जवाब मिला कि चिंतन शिविर में इस मुद्दे पर चर्चा होगी. शिविर में कांग्रेस को बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत सार्वजनिक अभियान के इर्द गिर्द बने परिवर्तनकारी बदलावों की घोषणा करनी होगी.

कांग्रेस को एक बड़े जन अभियान की जरूरत

आप और बीजेपी का राजनीतिक उदय एक शक्तिशाली जन अभियान के कारण हुआ. बीजेपी का उदय उसके पालमपुर अधिवेशन में राम मंदिर आंदोलन को अपनाने के बाद हुआ. जबकि कांग्रेस की सफलता उसके उपनिवेश विरोधी संघर्ष पर टिकी है. वहीं आम आदमी पार्टी ने अपनी सफलता अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले लोकपाल आंदोलन से बनाई. जबकि बीएसपी ने दलित सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपने आप को बड़ा बनाया. अगर कांग्रेस बीजेपी और आप के दोहरे हमले से बचना चाहती है तो उसे पार्टी की रणनीति को एक सार्वजनिक अभियान के इर्द-गिर्द घूमाना होगा.

अगर राहुल गांधी के प्रति वफादारी दिखाने के लिए चिंतन शिविर नतमस्तक हो जाता है तो यह एक तरह से उपहास जैसा होगा. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को विशेष सेवाएं मिल रही हैं छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत रेलवे स्टेशन पर उनका स्वागत करने गए थे. कांग्रेस पार्टी को अपनी इस अस्वस्थता पर ध्यान देने की जरूरत है, जिससे वह पीड़ित है. राहुल गांधी चुनावी जीत की गारंटी तो नहीं दे सकते, लेकिन बीजेपी से मुकाबला करने की चतुर योजना के साथ काम कर रही कांग्रेस को मजबूत कर सकते हैं. राहुल गांधी के राज्याभिषेक का भी इंतजार किया जा सकता है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, आर्टिकल में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं.)

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