इस साल फलती-फूलती रहेगी कपास की फसल, किसानों को रिकॉर्ड रेट मिलते रहने की उम्मीद

Cotton Price

कपास की फसल मराठवाड़ा से गायब हो रही है तो वहीं विदर्भ में इसका रकबा बढ़ रहा है. कृषि विभाग ने भविष्यवाणी की है कि मौजूदा सीजन की कीमतों को देखते हुए किसान फिर से कपास (Cotton) की खेती पर ध्यान देंगे. ये देखना होगा कि खरीफ सीजन में कपास के क्षेत्र में वृद्धि के बाद स्थिति क्या होती है, क्योंकि उत्पादन में गिरावट के कारण सीजन में रिकॉर्ड दर दर्ज की गई है. इसके अलावा, कपास पर आयत शुल्क में छूट के बाद भी कपास का रेट वैसे ही रह सकता है. मराठवाड़ा के परभणी बाजार समिति को रिकॉर्ड 12 हजार का रेट मिल रहा है. वहीं अकोला जिले में भी किसानों (Farmer) को कपास का 12 हजार रुपये का रिकॉर्ड रेट मिल रहा है.

2013 से 2018 तक कपास बाजार मंदी के दौर में था. नतीजतन, देश में कई कताई मिलें बंद हो गईं. मांग इतनी अधिक कभी नहीं रही, जितनी होनी चाहिए थी. मांग घटने का सीधा असर कपास की कीमतों पर पड़ा है. इसके अलावा, बॉलवर्म कीटों से होने वाले नुकसान को देखते हुए किसानों ने रकबा कम कर दिया था. लेकिन 2019 से सरकार ने फिर से सब्सिडी देने का फैसला किया. नतीजतन, बंद मिलें शुरू हो गई और मांग भी बढ़ गई है. विदर्भ में कपास का रकबा विशेष रूप से प्रतिकूल परिस्थितियों में बढ़ा है.

भारत में कपास का कुल उत्पादन

हालांकि समय के साथ क्षेत्र में गिरावट आई है, लेकिन उत्पादन में वृद्धि हुई है. देश में लगभग 36 मिलियन कपास की बिक्री होती है. 3 साल पहले 2 करोड़ 80 लाख गांठ की मांग थी, जो अब बढ़कर 3 करोड़ 40 लाख गांठ प्रति वर्ष हो गई है. इसके अलावा, किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की दरों से भी लाभ हुआ है. देश 60 से 70 लाख गांठ कपास का निर्यात करता है.

कपास की कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित होगी

उत्पादन में गिरावट के कारण इस साल कपास की रिकॉर्ड कीमत मिली है. भविष्य में भी यहीं स्थिति बनी रहने की संभावना है. ऐसा कृषि विभाग का अनुमान है. क्षेत्रफल बढ़ने पर भी रेट में बदलाव की संभावना कम है, क्योंकि आपूर्ति मांग को पूरा नहीं कर सकती है. इस साल के रिकॉर्ड रेट से किसानों को भी फायदा हुआ है. सीजन शुरू होने के बाद किसानों के पास कोई माल नहीं बचेगा, इसलिए नए माल की मांग अधिक होगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग ज्यादा है, इसलिए भारत से निर्यात होने वाले कपास की कीमत अधिक होगी. अभी कपास का भाव 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. कपास किसान शुरुआत से उच्च दरों की प्रतीक्षा कर रहे थे.

क्या कहना है कृषि विशेषज्ञ का?

केंद्र सरकार ने सीमा शुल्क हटा दिया है, लेकिन इससे अभी रेट पर कोई असर नहीं पड़ा है. कृषि विशेषज्ञ का अनुमान है कि राज्य की कताई मिलों की मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर आने वाले समय में दरें 8,000 – 9,000 से कम नहीं होंगी,अभी किसानों को कपास का भाव 12 हज़ार रुपये मिल रहा है.

Similar Posts