इस योजना के जरिए सीधे किसानों से जुड़ते हैं कृषि वैज्ञानिक, देते हैं नई तकनीक, तरीका और बीज पर जानकारी

Mera Gaon Mera Gaurav Yojana

किसानों (Farmers) के लिए देश में तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं. सरकार से लेकर संस्थानों तक के स्तर पर किसानों के जीवन को बेहतर करने और उनकी आमदनी को बढ़ाने का काम चल रहा है. इसी तरह की एक योजना है मेरा गांव, मेरा गौरव (Mera Gaon Mera Gaurav). यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस योजना के जरिए ICAR के तमाम वैज्ञानिक किसानों को नई तकनीक, नई किस्म, खेती के नए तरीके और बीज के बारे में जानकारियां देते हैं. 2015 में इस योजना की शुरुआत हुई थी. ICAR के उप माहनिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ एके सिंह ने बताया कि इस योजना का उदेश्य कृषि वैज्ञानिकों को गांव-किसानों से जोड़ने का था.

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रिसर्च के साथ खेती-किसानी को आसान बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम करते हैं. लेकिन इससे थोड़ा समय निकाल कर वे किसानों से मिलें. शोधकर्ता और शिक्षक किसानों से मिलकर उन्हें नई तकनीकों के बारे में बताएं. उन्होंने बताया कि इस योजना में वैज्ञानिकों की रुचि बढ़ रही है. वे अलग-अलग माध्यमों से किसानों से जुड़ते हैं और कृषि कार्यों को करने में उन्हें बेहतर बनाते हैं. वे कहते हैं कि योजना के तहत आईसीएआर और इसके संस्थानों के वैज्ञानिक किसी न किसी रूप में गांवों से जुड़ें रहें ताकि कृषि क्षेत्र की बेहतर के लिए सीधे काम कर सकें. पूरे देश में आईसीएआर के 102 संस्थान हैं. कुछ में लैब ओरिएंटेड कार्य होते हैं. ऐसे में वहां के वैज्ञानिक सीधे किसानों से संपर्क में नहीं आ सकते. लेकिन बाकी के वैज्ञानिकों में से ज्यादातर किसानों से जुड़े हुए हैं.

कई स्तर पर की जा रही किसानों की मदद

उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे संस्थान हैं, जहां पर सीधे तौर किसानों के लिए काम होता है. ऐसे में उन कार्यों में किसानों का सुझाव और उनकी स्वीकारोक्ति की जरूरत होती है. यहीं कारण है कि हम किसानों के नजरिए से समस्या को समझकर बेहतर समाधान दे पाते हैं. वे कहते हैं कि हम जो भी करते हैं, वो किसानों को इस्तेमाल करना होता है. ऐसे में किसानों के जरिए हम अपने काम में उनके हितों को ध्यान में रखकर बदलाव करते हैं या सुझाव देते हैं.

डॉ एके सिंह बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) मेरा गांव- मेरा गौराव योजना के तहत काफी बड़े स्तर पर काम कर रहा है. संस्थान ने दिल्ली-एनसीआर के आसपास करीब 605 गांवों तक अपनी पहुंच बनाई है. इन गांवों से वैज्ञानिक सीधे संपर्क में हैं. यहां तकनीक से लेकर नई बीज तक को किसानों तक पहुंचाया जाता है.

उपमहानिदेशक डॉ सिंह ने बताया कि देश में कृषि विज्ञान केंद्र फैले हुए हैं. ये सीधे तौर किसानों से जुड़कर काम करते हैं. किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड 5 करोड़ किसानों को समय-समय पर जानकारी मुहैया कराते हैं. वहीं 15 लाख किसानों को प्रत्येक साल ट्रेनिंग देते हैं. उन्होंने कहा कि केवीके बड़े पैमाने पर काम करते हैं और गांव से जुड़े हुए हैं. लेकिन मेरा गांव-मेरा गौरव योजना के तहत वे गांव शामिल नहीं हैं. इस योजना के तहत संस्थान में शोध करने वाले वैज्ञानिकों को रखा गया है.

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