आजमगढ़ उपचुनाव में सपा का गढ़ का फिर रहेगा अजेय या खिलेगा कमल, जाने क्या हैं सियासी समीकरण

Azamgarh By Poll

आजमगढ़ लोकसभा का चुनाव शांतिपूर्ण तरिके से संपन्न हो चुका है (Azamgarh Lok Sabha Bye Election). उपचुनाव में आजमगढ़ लोकसभा सीट के लिए कुल 13 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कुल 18.38 लाख मतदाता के हाथ में रहा (Azamgarh Election Voting) . हालांकि उपचुनाव में सामान्य से काफी कम 48.58% मतदान हुआ अगर बीते लोकसभा चुनाव से इसकी तुलना की जाए तो करीब 9 फीसद के करीब कम है. 2019 में 57.40% वोटिंग हुई थी.अब आजमगढ़ के चुनाव परिणाम को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीतिक गलियारों में एक अलग चर्चा का बाजार गर्म है. पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक यहीं चर्चा हो रही है कि आजमगढ़ का गढ़ क्या सपा (Samajwadi Party) सुरक्षित रख पाएगी या बीजेपी इस बार आजमगढ़ की धरती पर कमल खिलाएगी. चुनाव परिणाम आने में अभी हालांकि 48 घंटे शेष हैं. वहीं दूसरी तरफ मतदान के बाद के रुझान को अगर देखा जाए तो सपा के गढ़ में सेंध लगाना इतना आसान नहीं है. कुल मिलाकर देखा जाए तो आजमगढ़ में सपा का पलड़ा रहा अभी भी भारी दिख रहा है.

आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान में 48.58 फीसद मतदान हुआ जो पिछले लोकसभा चुनाव से यह मतदान करीब 9 फीसद कम है .वही कम मतदान होने के भी अलग मायने भी होते हैं . हालांकि राजनीतिक विश्लेषको का मानना हैं कि कम मतदान से चुनाव परिणाम में बहुत ज्यादा उलटफेर नहीं होता है.अगर यह मतदान का प्रतिशत आजमगढ़ में पहले के मुकाबले ज्यादा होता तो निश्चित रूप से यह कहा जा सकता था कि इससे बीजेपी को कुछ फायदा होने वाला है लेकिन ऐसा नहीं हो सका .वहीं दूसरी तरफ बसपा के उम्मीदवार शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली के चुनाव मैदान में होने से मुकाबले के त्रिकोणीय होने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन वो भी नहीं हो सका .इस वजह से अब मुख्य मुकाबला सपा के उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव और भाजपा उम्मीदवार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के बीच ही रह गया है. अखिलेश यादव के नहीं आने से ये लग रहा था शायद इसका कुछ असर होगा वहीं विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को खूब गरमाया जिससे मतदाताओं में फूट हो सके. फिलहाल आने वाली 26 जून की तारीख का इंतजार है जिसके बाद ही असल चुनाव परिणाम का पता चल सकेगा।

मुस्लिम मतदाताओं का कैसा रहा रुख

आजमगढ़ लोक सभा सीट पर 18 लाख मतदाताओं वैसे 24 फ़ीसदी के करीब मुस्लिम मतदाताओं की संख्या है .जो आजमगढ़ में यादव के बाद सर्वाधिक है .ऐसे में समाजवादी पार्टी का मुस्लिम- यादव समीकरण ही उसकी जीत का एक बड़ा कारण बनता रहा है. बसपा प्रत्याशी शाह आलम उर्फ़ गुड्डू जमाली के चुनाव मैदान में उतरने से यह माना जा रहा था कि मुकाबला त्रिकोणीय होगा लेकिन मतदान के दिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा. गुड्डू जमाली के पक्ष में जो मुस्लिम मतदाता खुलकर चुनाव प्रचार कर रहे थे. मतदान के दिन सपा के पक्ष में खड़े नजर आए. ऐसे में अब यह तय माना जा रहा है कि मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा धड़ा सपा के साथ है .वही यादव और मुस्लिम मतदाता ही आजमगढ़ के चुनाव परिणाम के लिए निर्णायक है. दोनों मतदाताओं के कुल प्रतिशत को मिला दिया जाए तो आजमगढ़ में 50 फ़ीसद पहुंच जाता है जो जीत के लिए पर्याप्त है.

आजमगढ़ में भाजपा संगठन में गुटबाजी का नुकसान

आजमगढ़ में भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के प्रचार प्रसार के लिए भाजपा ने 40 स्टार प्रचारकों को चुनाव मैदान में उतार दिया था. भाजपा के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण था लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा के संगठन में गुटबाजी का खामियाजा भी प्रत्याशी को भुगतना होगा. आजमगढ़ में भाजपा के लिए समान मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़े और दलित मतदाताओं में सेंधमारी की पूरी कोशिश थी जिसके बलबूते चुनाव में जीत दर्ज करने की तैयारी थी. भाजपा का जातिगत समीकरण सपा के मुकाबले काफी कमजोर रहा है . वहीं भाजपा को यह अनुमान था कि बसपा प्रत्याशी के मुस्लिम वोटों में बड़ी सेंधमारी करेंगे जिससे उन्हें फायदा होगा लेकिन मतदान के दिन ऐसा होता हुआ नहीं दिखा .

बारिश ने बिगाड़ा मतदान प्रतिशत

आजमगढ़ में दोपहर बाद मूसलाधार बारिश हुई इस बार इसका असर यह हुआ की मतदान बूथ तक पहुंचने के लिए मतदाताओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. जगह जगह जलभराव के चलते मतदानं व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा.ऐसे में ज्यादातर महिला और सवर्ण मतदाता घरों से निकलने से बचते रहे .इसी वजह से पिछली बार के मुकाबले मतदान का प्रतिशत भी कम रहा .हालांकि सपा के पक्ष की माने तो उनके मतदाताओं ने दोपहर तक बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया. ऐसे में कम मतदान प्रतिशत का नुकसान उन्हें नहीं बल्कि भाजपा को होगा . वहीं दूसरी तरफ यह माना जाता है कि सवाल मतदाताओं का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ रहता है. ऐसे में अगर मतदान बूथ तक यह मतदाता नहीं पहुंचे तो निश्चित रूप से इसका खामियाजा भी भाजपा को ही भुगतना होगा.

राजभर मतदाताओं का कैसा रहा रुख

आजमगढ़ की पांचों विधानसभा सीटों पर 80 हजार से ज्यादा राजभर मतदाता है .विधानसभा चुनाव में भी राजभर मतदाताओं ने सपा को फायदा पहुंचाया. आजमगढ़ की 10 विधानसभा सीटों सपा ने जीत दर्ज करने में राजभर मतदाताओं का भी बड़ा योगदान भी रहा है. आजमगढ़ लोकसभा के अंतर्गत आने वाली पांचों विधानसभा सीटों पर राजभर मतदाताओं की संख्या 10 से 15000 के करीब है. वहीं विधानसभा चुनाव के बाद राजभर मतदाता ओमप्रकाश राजभर से भी कुछ नाराज चल रहे हैं .ऐसे में राजभर मतदाताओं का रुख भी चुनाव परिणाम को काफी हद तक तय करेगा.

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