आखिर वो क्या कारण है, जिसके चलते दो सिर, तीन हाथ और 6 उंगलियों के साथ पैदा होते हैं बच्चे!

Dicephalic Parapagus

आपने खबरों में सुना होगा कि कई नवजात दो सिर या तीन हाथों के साथ जन्म लेते हैं. कई नवजातों के हाथ में पांच की जगह छह उंगलियां होती हैं. अक्सर ऐसे बच्चों की खबरें काफी चर्चाओं में रहती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसी डीफॉर्मिटी (Dicephalic Parapagus) के साथ बच्चे जन्म क्यों लेते हैं? इसके पीछे के कौन से वो वैज्ञानिक कारण (Scientific Reason) होते हैं जिसके चलते विकृतियां शरीर के किसी भी हिस्से में होती हैं. साथ ही इसको लेकर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं और क्या ऐसी विकृतियों का इलाज संभव हैं?

हाल में इंदौर में एक बच्चे ने जन्म लिया जिसके एक धड़ पर दो सिर, तीन हाथ हैं लेकिन इस बच्चे का दिल, फेफड़ा और पेट एक ही है. ऐसे केस में अक्सर होता है कि बच्चा जन्म तो लेता है लेकिन कुछ वक्त बाद उसकी मौत हो जाती है. लेकिन इस केस में डॉक्टरों ने मेहनत से इस बच्चे को बचा लिया है और वो एक महीने का हो गया है. ऐसे केस लाखों में एक होते हैं. मेडिकल साइंस में ऐसे केस को हाईसेफेलिक पैरापेगस कहते हैं. आइए जानते हैं कि हाईसेफेलिक पैरापेगस के कारण क्या हैं?

हाईसेफेलिक पैरापेगस का कारण

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इन शारीरिक विकृतियों के पीछे का कारण आनुवांशिक (जेनेटिक) होता है. भारत में 2 से 3 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनको ये विकृतियां होती हैं. ये विकृतियां भी कई प्रकार की होती हैं. इनमें कई ऐसी होती है जो काफी दुर्लभ होती हैं. कई विकृतियां जन्म से पहले ही पता चल जाती हैं, जबकि कई विकृतियां जन्म के वक्त नहीं पता चलती हैं और बाद में धीरे चलकर सामने आती हैं.

डॉक्टरों के मुताबिक जितना ज्यादा गंभीर विकृति होगी, समस्या उतनी देर से पता चलेगी. इन डीफॉर्मिटी यानि विकृतियों के पीछे का बड़ा कारण आनुवांशिक यानि जेनेटिक होता है. जीन में म्यूटेशन के चलते ऐसी समस्याएं पैदा होती हैं.

पारिवारिक भी होती हैं विकृतियां

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ विकृतियां वंशानुगत होती हैं यानि ऐसी समस्याएं जो पारिवार में चली आ रही हैं. जबकि कई मामले म्यूटेशन के कारण परिवारों में पहली बार सामने आते हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक गर्भावस्था के शुरुआती 16 से 20 हफ्तों के बीच ऐसी विकृतियों का पता लगाया जा सकता है. इनका पता लगाने में सामान्य सोनोग्राफी मददगार साबित होती है. इस प्रक्रिया के बाद जब विकृतियों का पता चलता है तो उसके आगे की जांच डॉक्टर करते हैं कि ये बच्चा भविष्य में कितना जी पाएगा. भारत के गांव कस्बों में मेडिकल उपकरण और सोनोग्राफी या अन्य टेस्ट की सुविधाएं मौजूद हों तो आसानी से ऐसी विकृतियों के बारे में पहले से पता लगाया जा सकता है.

कौन सी विकृतियां सबसे ज्यादा

ऐसे केस में जन्म के बाद शरीर के किसी भी हिस्से में विकृतियां पाई जा सकती हैं. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक सबसे ज्यादा दिल में ऐसी विकृतियां पाई जाती हैं. कई बार पैरों का टेढ़ा होना, रीढ़ की हड्डी का विकास नहीं होना आदि जैसी विकृतियां भी शामिल हैं. इसके अलावा कई बार सांस की और खाने की नली का जुड़ना या मल द्वार नहीं बना होना जैसी विकृतियां भी नवजातों में देखने को मिलती हैं.

क्या हैं इन विकृतियों का इलाज

डॉक्टरों के मुताबिक करीब 90 फीसदी विकृतियां ऐसी होती हैं, जिनका इलाज किया जा सकता है. ऑपरेशन द्वारा इन विकृतियों का इलाज किया जा सकता है. थायरॉइड के कारण हुईं विकृतियों का इलाज करना ज्यादा महंगा नहीं होता है लेकिन ये विकृतियों पर निर्भर करता है कि इसके इलाज की कीमत क्या है. इन विकृतियों के कारण नवजातों में मृत्यु दर 7 फीसदी है.

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