अमेरिका में मंदी आने की संभावना, ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर होगा असर: रिपोर्ट

recession expected in US will effect global economic growth

एशिया से लेकर यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ (Manufacturing Growth) में गिरावट देखी जा रही है. इसकी वजह है कि चीन में कोविड-19 (Covid-19) प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन (Russia Ukraine) की युद्ध की वजह से सप्लाई चैन में रूकावटें आ रही हैं. जबकि, अमेरिका में मंदी के बढ़ते जोखिम से वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के लिए नया खतरा पैदा हो गया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरो जोन में ज्यादा कीमतों का मतलब है कि जून में मैन्युफैक्चर्ड सामान की मांग मई 2020 में महामारी के फैलने के बाद सबसे ज्यादा तेज है. S&P ग्लोबल का फैक्ट्री पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडैक्स (PMI) 54.6 फीसदी से गिरकर 52.0 पर पहुंच गया है, जो करीब दो साल में सबसे निचला स्तर है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल इकोनॉमिक्स के Jack Allen-Reynolds ने कहा कि जून के यूरो जोन पीएमआई सर्वे में दिखता है कि सर्विसेज सेक्टर में और गिरावट आएगी. जबकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आउटपुट अब गिरता ही दिख रहा है. उन्होंने आगे कहा कि प्राइस इंडैक्स के बहुत मजबूत बने रहने के साथ, यूरो जोन स्टैगफ्लेशन के दौर में चला गया है.

अमेरिका में अभी और बढ़ेगी महंगाई: रिपोर्ट

अर्थशास्त्रियों ने गुरुवार को पब्लिश हुए रॉयटर्स के एक पॉल में अनुमान लगाया था कि 12 महीनों के भीतर मंदी आने की उम्मीद है. उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई, जो पिछले महीने 8.1 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी, उसके अभी रिकॉर्ड पर पहुंचना बाकी है. फेडरल रिजर्व के चेयर Jerome Powell ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक अमेरिका में मंदी लाने का काम नहीं कर रहा था. लेकिन वह कीमतों को काबू में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध था, चाहे इससे आर्थिक गिरावट आ जाए. उन्होंने मंदी की संभावना को सही बताया.

महंगाई फेड के लगाए गए 2 फीसदी से स्तर से कम से कम तीन गुना ज्यादा चल रही है. रॉयटर्स द्वारा किए गए पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इसमें अगले महीने में 75 बेसिस प्वॉइंट्स की और बढ़ोततरी होने की उम्मीद है.

इसके अलावा आपको बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था में इस वित्त वर्ष में 7 से 7.8 फीसदी की ग्रोथ रह सकती है. कई जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने कहा कि इसकी वजह बेहतर कृषि उत्पादन और रूस-युक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक रूकावटों के बीच दोबारा सुधर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था है.

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