अब CBSE, ICSE Board के स्टूडेंट्स को भी करनी होगी तेलुगू की पढ़ाई, यहां क्लास 1 से 10 के लिए अनिवार्य

Telangana

Telugu Language Compulsory: तेलंगाना सरकार ने CBSE, ICSE, IB और अन्य बोर्ड से जुडे़ स्कूलों में 1 से 10 क्लास तक के स्टूडेंट्स के लिए तेलुगु (Telangana Government Telugu Language) को दूसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया गया है. इस साल शुरू होने वाले अकेडमिक ईयर से नए नियम लागू हो जाएंगे. अब तेलंगाना के सभी स्कूलों में तेलुगु को दूसरी भाषा के रूप में एक अनिवार्य सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा. इस मामले से जुड़ा एक सर्कुलर हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया था, जो राज्य सरकार के तेलंगाना (स्कूलों में तेलुगु का अनिवार्य शिक्षण और सीखना) अधिनियम 2018 को चरणबद्ध तरीके से 2018-19 से लागू करने के हिस्से के रूप में है.

अधिनियम के मुताबिक, तेलुगु को पहली से दसवीं क्लास तक अनिवार्य कर दिया गया था, चाहे स्कूल किसी भी बोर्ड से जुड़े हुए हैं. सर्कुलर में कहा गया, ‘तेलंगाना राज्य में सभी प्रबंधन और विभिन्न बोर्ड से जुड़े स्कूलों (CBSE, ICSE, IB और अन्य बोर्ड) के लिए अकेडमिक ईयर 2022-23 से क्लास I-X से अनिवार्य विषय के रूप में तेलुगु को लागू करने के नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से देखा जाएगा. नियमों को तोड़ने पर तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा दिए गए अधिनियम और दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.’

नियम तोड़ने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने दो तेलुगु किताबों को डिजाइन किया है. इसमें से एक किताब तेलुगु भाषा बोलने वाले स्टूडेंट्स के लिए है, जबकि दूसरी किताब उन स्टूडेंट्स के लिए है, जिनकी मातृभाषा तेलुगु नहीं है. राज्य सरकार ने इस बात की चेतावनी भी दी है कि अगर नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा. सरकार ने तेलुगु भाषा को इसलिए अनिवार्य किया है, क्योंकि वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए तेलुगु भाषा और साहित्य की रक्षा और संरक्षण करना चाहती है.

इन दो किताबों को किया गया है तैयार

दरअसल, पिछले अकेडमिक ईयर के दौरान तेलुगु भाषा को लेकर बनाए गए नियमों को राज्य भर के सभी स्कूलों में पहली से नौवीं क्लास तक के छात्रों के लिए लागू किया था. लेकिन इस साल अकेडमिक ईयर में इसे पहली से लेकर दसवीं क्लास तक के स्टूडेंट्स के लिए लागू कर दिया गया है. स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बारे में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किया है. जिन बच्चों की मातृभाषा तेलुगु नहीं है. उनकी मदद के लिए विभाग ने पहली से पांचवीं क्लास के लिए ‘तेनेपालुकुलु’ और छठी से दसवीं कक्षा के लिए ‘वेनेला’ नामक किताबों को डिजाइन किया है.

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