अब पहले से ज्यादा फायदा देगा NPS का निवेश, कितना रिटर्न मिलेगा ये अब आपके हाथ में!

NPS Benefits

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेलवपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एक बड़ी योजना बनाई है. पीएफआरडीए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को और अधिक सुविधासंपन्न बना रहा है ताकि इसके ग्राहक अधिक से अधिक अपने रिटायरमेंट फंड का लाभ उठा सकें. एनपीएस की सुविधा बढ़ाने के लिए पीएफआरडीए ने एक साथ कई कदम उठाए हैं. ग्राहक अपने रिटायरमेंट के पैसे को इक्विटी में अधिक से अधिक जमा कर सकेंगे, पहले की तुलना में अधिक फंड मैनेजर चुनने का विकल्प मिलेगा और एक साल में अपने एसेट अलोकेशन में अधिक बदलाव किया जा सकेगा. पीएफआरडीए के इन कदमों से एनपीएस ग्राहक पहले से अधिक सुविधा और निवेश में आसानी प्राप्त कर सकेंगे.

एनपीएस में ग्राहक को अपना पैसा तीन तरह के एसेट में लगाने की छूट मिलती है. ग्राहक अपना पैसा इक्विटी, सरकारी सिक्योरिटी और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाते हैं. मौजूदा नियम के हिसाब से कोई ग्राहक एक साल में दो बार अपने एसेट अलोकेशन में बदलाव कर सकता है. अब नए नियम के मुताबिक ग्राहक इसमें एक साल में चार बार बदलाव कर सकेगा. एनपीएस के टियर 1 और टियर 2 अकाउंट में बराबर-बराबर बदलाव किए जा सकेंगे. एनपीएस में टियर 1 खाता अनिवार्य होता है जिसका लॉक इन पीरियड लंबा होता है.

ग्राहकों को क्या होगा फायदा

एसेट अलोकेशन में बदलाव का फायदा ग्राहक को कई मायनों में मिलेगा. ग्राहक को लगे कि वह अपना पैसा किसी और एसेट में लगा सकता है जिसमें अधिक रिटर्न मिल रहा है, तो उसे बदलाव करने की छूट मिलेगी. अभी एनपीएस में सात पेंशन फंड मैनेजर आते हैं जिनमें से ग्राहक को किसी एक मैनेजर को चुनना होता है. लेकिन अब वे एक से अधिक पेंशन फंड मैनेजर को चुन सकेंगे. पेंशन फंड में तीन नई कंपनियां जुड़ने वाली हैं जिनमें एक्सिस, मैक्स लाइफ और टाटा के नाम हैं. इससे फंड मैनेजर का दायरा और बढ़ जाएगा. इन तीन कंपनियों को अप्रूवल मिल गया है, लेकिन इनका काम अभी शुरू होना है. इस तरह एनपीएस में कुल 10 फंड मैनेजर हो जाएंगे.

पोर्टफोलियो का रिस्क भी जान सकेंगे

नए बदलाव के अंतर्गत ग्राहक अब हर पेंशन फंड की एनपीएस स्कीम का रिस्क प्रोफाइल जान सकेंगे. ग्राहकों को पता चल जाएगा कि किस पेंशन फंड की एनपीएस स्कीम में कितना जोखिम है. इससे उस फंड मैनेजर के एनपीएस में पैसा लगाना आसान हो जाएगा जो ग्राहक के लिए अधिक फायदेमंद हो. इसे रिस्क-ओ-मीटर कहते हैं जो बताता है कि स्कीम के पोर्टफोलियो में कितना रिस्क है. इससे ग्राहक को एनपीएस स्कीम लेने से पहले विस्तृत जानकारी मिल सकेगी.

एनपीएस में बाजार के हिसाब से रिटर्न मिलता है. बाजार में उथल-पुथल कम हो तो अधिक रिटर्न मिलता है. बाजार में गिरावट हो तो रिटर्न में कमी देखी जाती है. पीएफआरडीए इस पर भी काम कर रहा है और एक प्रस्ताव लाने की तैयारी में है जिसमें ग्राहकों को निश्चित रिटर्न मिलने की गारंटी दी जाएगी. एनपीएस में 12-14 परसेंट तक का रिटर्न देखा जाता है.

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