अगर किसानों ने अपना लिया पानी बचाने का यह तरीका तो बुंदेलखंड में खत्म हो जाएगी सबसे बड़ी समस्या

Water Harvesting

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बुंदेलखंड का इलाका जल संकट का सामना करना रहा है. यहां पर पानी की कमी के कारण किसानों (Farmers) के साथ ही आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस क्षेत्र में पानी की कमी की समस्या को दूर करने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जा रहा हैं. इसे के तहत यहां के बांदा जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत एक जल पंचायत का आयोजन किया गया. इसमें जल योद्धा, ग्राम प्रधान और उनके सचिवों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में गांव के पानी को गांव में कैसे रखें, इस बात पर चर्चा हुई.

रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में हुए इस कार्यक्रम में जल योद्धाओं ने बताया कि हमने विदेशों में जल संचयन पर काम किया है. हमारे पास बरसात का पानी संचय करने का एक साधन है. विदेशों में कई देश जल बचाने में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि आने वाले समय मे विश्व युद्ध पानी को लेकर हो सकता है. इसलिए खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़ के सहारे से हम पानी को रोक सकते हैं. इसमें किसानों की अहम भूमिका होगी. उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि हम अपने घरों में मटका में पानी भरते हैं. पीने के बाद खत्म हो जाता है, जिसे दोबारा भरते हैं. उसी प्रकार जमीन का पानी भी खत्म हो रहा है औप 10 प्रतिशत ही बचा है. ऐसे में हमे जल संचय करना होगा.

सभी को प्रयास करने की जरूरत

जल योद्धाओं ने बताया कि यदि खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़ की योजना पूरे बुंदेलखंड में लागू हो जाए तो कुदरत का पानी का घड़ा भर जाएगा और बुंदेलखंड में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी. हमे अपने घर बनाने के सबसे पहले पानी संचय करने के लिए पहल करनी चाहिए. हमे पानी को हरहाल में बचाना पड़ेगा.

जल योद्धाओं ने जिला अधिकारी बांदा को बताया और कहा कि वे पानी के लिए गांव-गांव जाकर लगातार प्रयास कर रहे हैं. नीति आयोग के सदस्य उमाशंकर पांडेय ने कहा कि हमारे पूर्वज 4 धाम यात्रा कर पानी लाते हैं. कुरान में पानी को गंदा करना मना है. गांव का प्रथम नागरिक प्रधान होता है तो अपने-अपने गांव को मॉडल बनाइए. पानी के बगैर कोई जीवित नहीं रह सकता. आप सभी लोग अपने गांव को पानीदार बना दिया तो बुंदेलखंड की समस्या खत्म हो जाएगी. पीएम मोदी का सपना पूरा हो जाएगा.

बरसात का पानी खेत मे रोकने के लिए खेतों में मेड़बंदी की जा सकती है. गांव में पानी रोकने के लिए चेकडैम, तालाब या कुएं बनाए जा सकते हैं, जो आने वाले कल के लिए उपयोगी होगा. जिले में पीएम मोदी की प्रेरणा से डीएम अनुराग पटेल आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम में जल जीवन मिशन में मृत नदियों, झील और तालाबो को जीवित करने का संकल्प उठाया है. इसमें गांव से लेकर शहर तक के लोग श्रमदान कर बांदा को पानीदार बनाने में जुटे हैं.

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