अंग्रेजों की क्रूरता ने मारे थे 1.8 अरब हिंदुस्तानी… हालात ये थे कि कई साल जनसंख्या ही नहीं बढ़ी

British Rules

मानव जाति के इतिहास में अंग्रेजों ने भारत में सबसे भयानक नरसंहार किए. बार-बार पड़ने वाले अकाल इस व्यवस्थित नरसंहार के एक हिंसक प्रकार थे. जिस क्रूर तरीके से अंग्रेजों ने किसानों और छोटे कारीगरों को उनकी उपज पर अकल्पनीय कर लगाकर खून बहाया, वह सिस्टमेटिक विनाश का एक और रूप था. ब्रिटिश शासन के करीब 200 वर्षों में मूल निवासियों के खिलाफ ब्रिटिश बर्बरता के कई उदाहरण हैं.

दो विश्व युद्धों में इन उपनिवेशवादियों ने जिस निर्दयता से भारतीयों को चारे के रूप में इस्तेमाल किया, वह उनकी अमानवीयता का एक और उदाहरण था. पुलिस और सेना की बर्बरता से, विशेष रूप से जलियांवाला बाग में, असंख्य निर्दोष भारतीय मारे गए.

1.8 अरब लोगों की मौत

जानमानी अर्थशास्त्री और प्रोफेसर उत्सा पटनायक (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) ने अनुमान लगाया है कि ब्रिटेन ने 1765 और 1938 के बीच भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर लूटा. प्रभात पटनायक के साथ लिखी उनकी किताब “ए थ्योरी ऑफ इम्पीरियलिज्म” (2016) ने अनुमान लगाया है कि ब्रिटिश राज (1757-1947) के तहत 1.8 बिलियन भारतीयों की मृत्यु हुई.

1757 में प्लासी की लड़ाई में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की हार के बाद हिंसक शोषण शुरू हुआ. अंग्रेजों ने पराजित बंगालियों से भारी रियायतें लीं. 1764 में बक्सर की लड़ाई में अंग्रेजों ने बंगालियों को हरा दिया था और 1765 में मुगल सम्राट शाह आलम को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में कराधान (दीवानी) की शक्ति देने के लिए “मजबूर” किया गया. अंग्रेजों ने बंगालियों पर भारी राजस्व का बोझ डाला.

बंगाल का महाअकाल

परिणामस्वरूप, 1769-1770 के बंगाल में पड़े अकाल में एक करोड़ बंगाली मारे गए. ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने राजस्व का लगभग एक तिहाई हिस्सा भारतीय सामान खरीदने के लिए उपयोग किया और बंगालियों को अपने माल पर अत्यधिक कर का भुगतान करना पड़ा था.

1840 के दशक तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्तमान भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकांश हिस्सों पर प्रभुत्व जमा लिया था और ब्रिटिश सरकार अधिक से अधिक शोषणकारी नीति अपना रही थी. निर्दयी कराधान के साथ-साथ भारत में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण को खत्म किया जा रहा था. जबकि अंग्रेजों के आने से पहले भारत वस्त्र, कृषि उत्पाद और धातुओं के उत्पादन में दुनिया का अग्रणी देश था. लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद यह कच्चे माल का निर्यातक और ब्रिटेन में निर्मित वस्तुओं का आयातक बन गया.

  1. थोपी गई गरीबी की मार
  2. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में गरीबी और मौत को बोलबाला रहा.
  3. 1769-1770 के बंगाल अकाल में 1 करोड़ बंगाली अधिक कर की वजह से भूखे मर गए.
  4. 1769-1770 और 1942-1945 (WW2) में मानव निर्मित अकालों के कारणों करोड़ों भारतीय मारे गए.
  5. इतिहासकार अमरेश मिश्रा ने अनुमान लगाया है कि 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद के दशक में 2,000 ब्रिटिश मौतों के प्रतिशोध के रूप में 10 मिलियन भारतीयों का नरसंहार किया गया.
  6. बहुत अधिक जन्म दर के बावजूद, 1860 (292 मिलियन) और 1934 (292 मिलियन) के बीच भारत की जनसंख्या नहीं बढ़ी.
  7. 1942 में विंस्टन चर्चिल ने बंगाल, उड़ीसा, बिहार और असम में जानबूझकर भारतीय को भूख से मरने के लिए मजबूर किया. करीब चार साल में 6-7 मिलियन भारतीय मारे गए, क्योंकि अंग्रेजों ने भारत से अनाज का निर्यात किया और अनाज के आयात को कम कर दिया.
  8. प्रोफेसर उत्सा पटनायक के अनुसार, 1900 में भारतीयों की प्रति व्यक्ति वार्षिक भोजन की खपत 200 किलोग्राम थी, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और 1946 में यह घटकर 137 किलोग्राम रह गई.
  9. “इनग्लोरियस एम्पायर” में शशि थरूर लिखते हैं, “ब्रिटिश 16 फीसदी साक्षरता वाला समाज छोड़ कर गए. उस समय जीवन प्रत्याशा 27 थी. कोई घरेलू उद्योग नहीं था और 90 फीसदी से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे थे.

अकाल से पलायन बढ़ा

भारतीयों को जान-बूझकर भूखा रखने की ब्रिटिश नीतियों के और भी दुष्परिणाम हुए. अकाल के कारण भारत से बहुत से मजदूरों को मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद, टोबैगो सूरीनाम जैसे उष्णकटिबंधीय ब्रिटिश उपनिवेशों में जाना पड़ा.

स्थानीय भाषाओं पर हमला

अंग्रेजों ने भी जान-बूझकर भारतीयों की भाषा को खत्मकर उनकी मानवीय गरिमा को खोखला करने का काम किया. बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सचिव लॉर्ड मैकाले ने 1835 में “मिनट ऑन एजुकेशन” में गवर्नर-जनरल से भारतीयों के अल्पसंख्यक को अंग्रेजी सिखाने का आग्रह किया. उन्होंने तर्क दिया कि “हमें एक वर्ग ऐसा बनाना चाहिए जो हमारे लिए दुभाषिया का काम करे.”

बांटो और राज करो की नीति

ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत के अपने उपनिवेशीकरण के दौरान फूट डालो और राज करो की सदियों पुरानी राजनीतिक रणनीति को अपनाया. उन्होंने इस क्षेत्र पर शासन करने के लिए स्थानीय लोगों को एक दूसरे के खिलाफ करने की रणनीति का इस्तेमाल किया.

200 वर्षों तक भारत पर अत्याचार करने के बाद और भारत की संपत्ति लूट कर अपने खजाने को भरने के बाद ब्रिटेन ने भारतीय उपमहाद्वीप को छोड़ने से ठीक पहले इसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए. भारत की आजादी के साथ 1947 के विभाजन की वजह से लगभग एक मिलियन लोग मारे गए और 13 मिलियन विस्थापित हुए. भारत अभी भी उस सांप्रदायिक विभाजन की हानिकारक विरासत से जूझ रहा है जिसे अंग्रेज छोड़ कर गए.